Mosquito Fleet: ईरान ने एक बार फिर दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है। इस बार ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसकी सेना नहीं, बल्कि उसकी 'मॉस्किटो फ्लीट' (Mosquito Fleet) बनी हुई है। छोटे और तेज रफ्तार जहाजों के इस झुंड ने अमेरिकी नौसेना और वैश्विक व्यापार के लिए एक बड़ा सिरदर्द पैदा कर दिया है।
क्या है यह 'मॉस्किटो फ्लीट'?
इसे 'मॉस्किटो' फ्लीट इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये नाव आकार में छोटी हैं, लेकिन मच्छर की तरह झुंड में आकर घातक हमला करती हैं। ये नावें सर्फिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली स्पीड-बोट्स जैसी दिखती हैं, लेकिन इन्हें रॉकेट और मशीनगनों से लैस किया गया है। इनमें से कुछ नावें 100 नॉट्स यानी करीब 185 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं, जो इन्हें दुनिया की सबसे तेज नौसैनिक नावों में से एक बनाती है। इस बेड़े का नियंत्रण ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के पास है, जो 'हिट एंड रन' यानी हमला करो और भाग जाओ की रणनीति पर काम करते हैं।
ईरान ने अब इस बेड़े में केवल नावें ही नहीं, बल्कि मिनी पनडुब्बियां और समुद्री ड्रोन भी शामिल कर लिए हैं। ये पानी के नीचे से चुपके से हमला करने में सक्षम हैं, जिससे खतरा कई गुना बढ़ गया है।
अमेरिका के लिए क्यों है यह बड़ी चुनौती?
अमेरिकी नौसेना के पास विशाल विमानवाहक पोत और भारी तोपें हैं, लेकिन वे इस 'मॉस्किटो बेड़े' के सामने बेबस नजर आ रहे हैं। ये नावें इतनी छोटी हैं कि सैटेलाइट सिस्टम इन्हें आसानी से ट्रैक नहीं कर पाते। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अपने पथरीले समुद्र तटों पर कम से कम 10 ऐसे बेस बनाए हैं जो गुफाओं के अंदर छिपे हैं। ये नावें कुछ ही मिनटों में गुफाओं से निकलकर हमला कर सकती हैं।
एक अमेरिकी मिसाइल की कीमत इन नावों की कीमत से कहीं ज्यादा होती है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बावजूद, ईरान के पास अभी भी हजारों की संख्या में ऐसी नावें मौजूद हैं।
व्यापारिक जहाजों के लिए 'काल'
भले ही अमेरिकी युद्धपोत अपनी रक्षा कर लें, लेकिन वहां से गुजरने वाले तेल टैंकर और कार्गो शिप निहत्थे होते हैं। इंटरनेशनल मैरीटाइम एजेंसी के मुताबिक, मौजूदा संघर्ष के दौरान कम से कम 20 जहाजों पर इन नावों द्वारा हमला किया गया है। ईरान इन नावों का इस्तेमाल समुद्री रास्ते को जबरन बंद करने के लिए कर रहा है, जिससे ईंधन की सप्लाई पूरी दुनिया में बाधित हो गई है।