Strait Of Hormuz: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में से एक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव चरम पर है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि यह समुद्री रास्ता फिलहाल बंद है और यह तब तक नहीं खुलेगा जब तक उनके सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई का आदेश नहीं मिल जाता। ईरान ने एक कमर्शियल जहाज को भेजे संदेश में सख्त लहजे में कहा, 'यह रास्ता किसी बेवकूफ के ट्वीट से नहीं, बल्कि हमारे इमाम खामेनेई के आदेश से खुलेगा।'
ईरान की इस चेतावनी के बाद समुद्र में जहाजों की आवाजाही पर बड़ा असर पड़ा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कतर से LNG लेकर निकले कम से कम 5 बड़े टैंकर जो पिछले एक महीने से खाड़ी में फंसे थे, उन्होंने अपना रास्ता बदल लिया है या गति धीमी कर दी है। ब्रिटिश मिलिट्री की एजेंसी UKMTO के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की गनबोट्स ने एक टैंकर पर गोलीबारी की है। वहीं, एक अन्य कंटेनर जहाज पर प्रोजेक्टाइल गिरने से उसके कार्गो को नुकसान पहुंचा है।
भारत ने ईरान के राजदूत को किया तलब
इस विवाद की आंच अब भारत तक भी पहुंच गई है। बीते दिन दो भारतीय झंडे वाले मर्चेंट शिप पर भी फायरिंग हुई है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे एक 'गंभीर' घटना बताते हुए ईरान के राजदूत को तलब किया है और अपनी चिंता व्यक्त की है। हालांकि जानकारी के मुताबिक, बाद में भारत के जहाज ने होर्मुज पार लिया।
हैरानी की बात यह है कि शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि होर्मुज का रास्ता 'पूरी तरह खुला' है। लेकिन कुछ ही घंटों बाद ईरान की सेना ने इसे पलट दिया और कहा कि अब इस रास्ते का 'सख्त प्रबंधन' सेना के हाथ में है। ईरानी सेना का कहना है कि जब तक अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म नहीं करता, तब तक वे होर्मुज को नहीं खोलेंगे।
अमेरिका और ईरान में 'डेडलॉक'
यह पूरा संकट अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई असफल बातचीत का नतीजा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पिछले एक हफ्ते में ईरान जाने वाले 23 जहाजों को रोक दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं होता, तब तक ईरान पर पाबंदियां जारी रहेंगी। वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि वे अपनी शर्तों पर ही रास्ता खोलेंगे, जिसमें जहाजों के लिए तय रूट, परमिट और 'ट्रांजिट फीस' शामिल हो सकती है।
क्यों डरी हुई है पूरी दुनिया?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की जीवनरेखा है। अगर यह रास्ता बंद रहता है, तो दुनिया भर में गैस और तेल की भारी किल्लत हो सकती है। सप्लाई चेन टूटने से खाने-पीने की चीजों और कच्चा माल महंगा हो जाएगा, जिससे वैश्विक महंगाई बढ़ेगी। मौजूदा 'युद्धविराम' इस हफ्ते 21 अप्रैल को खत्म होने वाला है, जिससे युद्ध का खतरा और बढ़ गया है।