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तेल के बाद दुनिया का 'इंटरनेट शटडाउन' करने वाला है ईरान! नए प्लान से गूगल, मेटा और अमेजन में मचेगी तबाही? समझें पूरा खेल

Hormuz Digital Chokepoint: इस डिजिटल युद्ध का सबसे बड़ा खामियाजा भारत को भुगतना पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत का यूरोप और अमेरिका जाने वाला एक बहुत बड़ा इंटरनेट ट्रैफिक इसी खाड़ी क्षेत्र और लाल सागर के नीचे से गुजरने वाली केबल्स पर निर्भर करता है। अगर ईरान इन केबल्स के रखरखाव में अड़ंगा लगाता है, तो भारत में करोड़ों यूजर्स के लिए क्लाउड सर्विसेज, ऑनलाइन पेमेंट ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की रफ्तार सुस्त पड़ जाएगी

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड May 18, 2026 पर 12:06 PM
तेल के बाद दुनिया का 'इंटरनेट शटडाउन' करने वाला है ईरान! नए प्लान से गूगल, मेटा और अमेजन में मचेगी तबाही? समझें पूरा खेल
अब ईरान ने एक ऐसा 'मास्टरप्लान' तैयार किया है, जिससे दुनिया भर में इंटरनेट का चक्का जाम हो सकता है

Hormuz Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य तनातनी अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है, जो सीधे आपकी डिजिटल लाइफ को ठप कर सकती है। अब तक दुनिया सिर्फ इस बात से डरी हुई थी कि होर्मुज संकट के कारण कच्चे तेल की सप्लाई रुक जाएगी और पेट्रोल-डीजल महंगा हो जाएगा। लेकिन अब ईरान ने एक ऐसा 'मास्टरप्लान' तैयार किया है, जिससे दुनिया भर में इंटरनेट का चक्का जाम हो सकता है।

ईरानी मीडिया और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि तेहरान अब होर्मुज के नीचे बिछी उन समुद्री फाइबर-ऑप्टिक केबल्स पर अपना कंट्रोल बढ़ाना चाहता है, जो पूरी दुनिया का डिजिटल डेटा ट्रांसफर करती हैं। अगर ऐसा होता है, तो गूगल, मेटा, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज टेक कंपनियों का पूरा साम्राज्य हिल जाएगा।

तेल नहीं, डेटा है नया चोकपॉइंट!

अक्सर लोग सोचते हैं कि इंटरनेट सैटेलाइट के जरिए हवा में तैरता है, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। दुनिया का 95% से ज्यादा इंटरनेट डेटा समुद्र की लहरों के नीचे बिछी बेहद पतली फाइबर-ऑप्टिक केबल्स के जरिए एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक सफर करता है।

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