होर्मुज से गुजरने के लिए देना होगा 'टोल टैक्स', ईरान ने कहा- सुरक्षा के बदले जहाजों को चुकाना होगा शुल्क!

Toll Tax On Strait Of Hormuz: ईरान का ट्रक है कि, जैसे जमीन पर बने रास्तों से माल गुजरने पर ड्यूटी दी जाती है, वैसे ही होर्मुज भी एक कॉरिडोर है। वह इस रास्ते की सुरक्षा पर पैसा और संसाधन खर्च करता है, इसलिए जहाजों को इसके बदले भुगतान करना चाहिए

अपडेटेड Mar 26, 2026 पर 11:07 AM
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होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की लाइफलाइन है

Toll On Strait Of Hormuz: मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच ईरान ने एक ऐसा कदम उठाने की तैयारी की है जो वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था में खलबली मचा सकता है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की संसद एक ऐसा कानून बनाने जा रही है, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले हर जहाज और टैंकर से 'टोल टैक्स' वसूला जाएगा। ईरान का तर्क है कि वह इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, इसलिए इसका शुल्क लेना 'बिल्कुल स्वाभाविक' है।

ईरान का तर्क- 'सुरक्षा हमारी, तो टैक्स भी हमारा'

ईरानी संसद की नागरिक मामलों की समिति के अध्यक्ष ने इसे लेकर प्रस्ताव की पुष्टि की है। उनके अनुसार, जैसे जमीन पर बने रास्तों से माल गुजरने पर ड्यूटी दी जाती है, वैसे ही होर्मुज भी एक कॉरिडोर है। ईरान का कहना है कि वह इस रास्ते की सुरक्षा पर पैसा और संसाधन खर्च करता है, इसलिए जहाजों को इसके बदले भुगतान करना चाहिए। जानकारी के मुताबिक, इस कानून का ड्राफ्ट तैयार है और जल्द ही इसे अंतिम रूप देकर पास कर दिया जाएगा।


दुनिया के लिए क्यों है यह 'बड़ी मुसीबत'?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की लाइफलाइन है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अगर ईरान यहां टैक्स वसूलना शुरू करता है या रास्ता रोकता है, तो यह इतिहास का सबसे बड़ा 'एनर्जी शॉक' साबित हो सकता है। इसकी वजह से दुनियाभर में ईंधन की किल्लत बढ़ गई है। एयरलाइंस से लेकर सुपरमार्केट और किसानों तक, हर कोई बढ़ती लागत और डीजल की कमी से जूझ रहा है।

बातचीत को लेकर ट्रंप और तेहरान में विरोधाभास

ईरान और अमेरिका के बीच चल रही कूटनीति बातचीत पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेता डील करने के लिए 'मरे जा रहे हैं', लेकिन वे अपने देश के लोगों और विद्रोह के डर से इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। ट्रंप के इस बयान को ईरान ने सिरे से इनकार कार दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा कि हम सिर्फ दोस्तों के जरिए संदेश भेज रहे हैं और चेतावनियां दे रहे हैं, इसे 'बातचीत' या 'संवाद' नहीं कहा जा सकता।

बढ़ते तनाव से भारी नुकसान

राजनयिक कोशिशों के बीच सैन्य कार्रवाई भी चरम पर है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के चीफ एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, ईरान के भीतर 10,000 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया है। अमेरिका का दावा है कि ईरान के 92% बड़े नौसैनिक जहाज नष्ट कर दिए गए हैं और उनके मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता में 90% की कमी आई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी आगाह किया है कि दुनिया एक 'बड़े युद्ध की कगार' पर खड़ी है और अब कूटनीति की तरफ मुड़ना ही एकमात्र रास्ता है।

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