Israel-Iran War: खाड़ी देशों को होने लगी बजट की तंगी, विदेशी निवेश का कर सकते हैं रिव्यू; US को भी लग सकता है झटका

Israel-Iran War: खाड़ी देश उस लड़ाई में घसीटे गए हैं, जो US और इजराइल ने ईरान के खिलाफ शुरू की थी। जवाबी कार्रवाई के तहत ईरान ने इजराइल के साथ-साथ मध्यपूर्व के कई देशों पर भी हमले किए। खाड़ी देश दुनिया के कुछ सबसे बड़े और सबसे एक्टिव सॉवरेन वेल्थ फंड को मैनेज करते हैं

अपडेटेड Mar 06, 2026 पर 11:38 AM
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सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर ने मिलकर अपने बजट और अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहे दबाव पर चर्चा की है।

ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमलों के बाद खाड़ी देश अपने बजट पर दबाव कम करने के विकल्पों के बारे में सोच रहे हैं। इसके तहत ये देश अपने विदेशी निवेश और भविष्य के कमिटमेंट का रिव्यू करना शुरू कर सकते हैं। यह बात फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में कही गई है। अखबार ने खाड़ी के एक अधिकारी के हवाले से कहा है कि इस इलाके में जो संघर्ष हुआ है, उसका असर दूसरे देशों या कंपनियों को निवेश के वादे, स्पोर्ट्स स्पॉन्सरशिप, बिजनेस और निवेशकों के साथ कॉन्ट्रैक्ट, या होल्डिंग्स की बिक्री पर पड़ सकता है। खासकर अगर युद्ध और उससे जुड़े खर्चे इसी रफ्तार से जारी रहे तो।

खाड़ी की 4 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से 3– सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर ने मिलकर अपने बजट और अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहे दबाव पर चर्चा की है। दशकों से खाड़ी देशों का उदय दो मुख्य बातों पर टिका है। पहली यह कि इनके तेजी से ग्रो करते शहर एक अस्थिर इलाके में सुरक्षित पनाह देते हैं और दूसरी यह कि बिना किसी रुकावट वाले एनर्जी एक्सपोर्ट से बहुत सारा पैसा आता रहेगा। हाल की घटनाओं ने दोनों ही बातों को एक साथ हिला दिया है।

बजट की तंगी से जूझने लगे हैं खाड़ी देश


फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, एक गल्फ अधिकारी का कहना है, “कई खाड़ी देशों ने यह तय करने के लिए इंटरनल रिव्यू शुरू कर दिया है कि क्या मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट में फोर्स मेज्योर क्लॉज लागू किए जा सकते हैं। साथ ही मौजूदा और भविष्य की निवेश प्रतिबद्धताओं का भी रिव्यू किया जा रहा है ताकि मौजूदा युद्ध से होने वाले अनुमानित आर्थिक दबाव को कुछ कम किया जा सके।”

यह एक एहतियाती कदम है, जो इन देशों में सामने आई बजट की तंगी का नतीजा है। एनर्जी से होने वाली कमाई में कमी, प्रोडक्शन में कमी या शिपमेंट न कर पाने, टूरिज्म और एविएशन सेक्टर में छा गए संकट और डिफेंस खर्च में बढ़ोतरी की वजह से खाड़ी देश बजट में कमी से जूझ रहे हैं।

खाड़ी देशों का कदम अमेरिका की बढ़ा सकता है चिंता

खाड़ी देश दुनिया के कुछ सबसे बड़े और सबसे एक्टिव सॉवरेन वेल्थ फंड को मैनेज करते हैं। वे दुनिया भर में स्पोर्टिंग इवेंट्स के भी बड़े सपोर्टर हैं। उनके द्वारा विदेशी निवेश और भविष्य के कमिटमेंट का रिव्यू कर सकने की संभावना ने अमेरिका का ध्यान खींचा है। बता दें कि सऊदी अरब, UAE और कतर ने पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस इलाके के दौरे के बाद अमेरिका में सैकड़ों अरब डॉलर निवेश करने का वादा किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, US या दूसरे पश्चिमी देशों में निवेश पर असर डालने वाला कोई भी कदम ट्रंप पर युद्ध खत्म करने के लिए डिप्लोमैटिक स्ट्रैटेजी बनाने का दबाव बढ़ा सकता है।

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ईरान-इजराइल की जंग में बेवजह पिस गए खाड़ी देश

खाड़ी देश उस लड़ाई में पिस गए हैं, जो US और इजराइल ने ईरान के खिलाफ शुरू की। 28 फरवरी 2026 को इजराइल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ खुली जंग का ऐलान करते हुए एयर स्ट्राइक की। कुछ ही घंटों में ईरान ने भी जवाब देते हुए मिसाइल और ड्रोन से इजराइल पर हमले कर दिए। इसके अलावा ईरान ने मध्यपूर्व के कई देशों पर भी हमले किए। युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से शिपमेंट धीमा हो गया है। यह समंदर में वह महत्वपूर्ण रूट है, जिससे दुनिया के तेल और गैस शिपमेंट का पांचवां हिस्सा गुजरता है।

लिक्विफाइड नैचुरल गैस में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े प्रोड्यूसर कतर को इस हफ्ते फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ा, क्योंकि उसके मेन LNG प्लांट पर ड्रोन हमले के बाद प्रोडक्शन रोक दिया गया।फोर्स मेज्योर यानि प्राकृतिक या नियंत्रण से बाहर की घटना की वजह से समझौते की शर्तें पूरी न कर पाना। सऊदी अरब की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरियों में से एक पर भी हमला हुआ है। ईरान ने खाड़ी देशों में US के बेस और एम्बेसी के साथ-साथ एयरपोर्ट, होटल और रिहायशी बिल्डिंग्स पर भी हमला किया है। हमलों के चलते एयर ट्रैफिक और टूरिज्म बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।

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