13 जून की सुबह, जब दुनिया गहरी नींद में थी, इजरायल ने एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया जिसे उसने "जरूरत से पहले वाला हमला" करार दिया। लेकिन यह हमला कोई आम सैन्य ऑपरेशन नहीं था, यह एक सुनियोजित झटका था ईरान की सैन्य और परमाणु नींव पर। 100 से ज्यादा हवाई और ड्रोन हमलों ने ईरान के न्यूक्लियर प्लांट, रिवोल्यूशनरी गार्ड के हेडक्वार्टर, मिसाइल डिपो और गुप्त खुफिया ठिकानों को खाक में मिला दिया। मरने वालों की संख्या 224 पार कर गई और कई हाई-सेक्योरिटी न्यूक्लियर साइट्स मलबे में तब्दील हो गईं। लेकिन यह हमला एक रात में तय नहीं हुआ था। इसकी बुनियाद तो सालों पहले रखी जा चुकी थी — एक ‘जेम्स बॉन्ड’ टाइप मिशन के साथ।
