एक हफ्ते या एक महीने में नहीं... मोसाद चीफ ने खुद बताया ईरान की सत्ता को गिराने में लगेगा कितना समय

US Israel Iran War: शुरुआत में इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और तत्कालीन अमेरिकी नेतृत्व ने बड़े दावे किए थे, लेकिन अब उनके स्वर थोड़े ठंडे पड़ते दिख रहे हैं। अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने हाल ही में कहा कि ईरान की सरकार अभी भी बरकरार है

अपडेटेड Mar 24, 2026 पर 8:00 PM
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US Israel Iran War: मोसाद चीफ ने खुद बताया ईरान की सत्ता को गिराने में लगेगा कितना समय

मध्य पूर्व (Middle East) के रणक्षेत्र से एक ऐसी खबर निकलकर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को चौंका दिया है। क्या इजरायल की खुफिया एजेंसी 'मोसाद' ईरान में सत्ता परिवर्तन की पटकथा लिख चुकी है? एक ताजा रिपोर्ट में मोसाद चीफ डेविड बार्निया के उन दावों का खुलासा हुआ है, जो उन्होंने युद्ध शुरू होने से पहले इजराइली कैबिनेट के सामने रखे थे।

हफ्तों नहीं, लगेगा 1 साल: बार्निया का 'डेडली' असेसमेंट

'द जेरूसलम पोस्ट' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोसाद चीफ डेविड बार्निया ने इजरायली नेताओं को आगाह किया था कि तेहरान में शासन बदलना मुमकिन तो है, लेकिन यह कोई 'ओवरनाइट' यानी रातों-रात होने वाला काम नहीं है। जहां कुछ लोग चंद हफ्तों में ईरानी सरकार गिरने का सपना देख रहे थे, वहीं बार्निया ने साफ कर दिया कि इसमें कम से कम 1 साल का वक्त लग सकता है।


क्या था मोसाद का 'मिशन ईरान'?

रिपोर्ट्स के अनुसार, मोसाद का मानना है कि ईरान की सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए तीन बड़े कदम जरूरी हैं:

  • नेतृत्व का सफाया: ईरान के शीर्ष नेताओं को रास्ते से हटाना।
  • संस्थाओं को ध्वस्त करना: सरकार चलाने वाली मशीनरी को पंगु बनाना।
  • दमनकारी शक्ति को कमजोर करना: उस ताकत को खत्म करना, जिससे ईरान अपने ही नागरिकों के विद्रोह को कुचल देता है।

न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा vs हकीकत

दिलचस्प बात यह है कि 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने पहले दावा किया था कि मोसाद को उम्मीद थी कि युद्ध शुरू होते ही ईरान की जनता सड़कों पर उतर आएगी और विद्रोह की आग में सरकार जल जाएगी। लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली। युद्ध के तीन हफ्ते बीत जाने के बाद भी अमेरिकी और इजरायली इंटेलिजेंस का मानना है कि "ईरान कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन अभी भी टिका हुआ है।"

नेतन्याहू और अमेरिका के बदले सुर

शुरुआत में इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और तत्कालीन अमेरिकी नेतृत्व ने बड़े दावे किए थे, लेकिन अब उनके स्वर थोड़े ठंडे पड़ते दिख रहे हैं। अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने हाल ही में कहा कि ईरान की सरकार अभी भी बरकरार है, हालांकि उसकी क्षमताएं काफी हद तक नष्ट हो चुकी हैं।

खुद नेतन्याहू ने अब संभलकर बयान देते हुए कहा है, "हम ऐसी स्थितियां पैदा कर रहे हैं जिससे शासन गिर सके। यह गिर भी सकता है और बच भी सकता है। लेकिन अगर बचा भी, तो यह पहले जैसा ताकतवर नहीं रहेगा।"

क्या यह केवल मनोवैज्ञानिक युद्ध है?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की रिपोर्ट्स का बाहर आना ईरान के भीतर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक कोशिश हो सकती है। क्या मोसाद का 'एक साल वाला प्लान' काम करेगा या ईरान अपनी जड़ें और मजबूत कर लेगा? यह तो वक्त ही बताएगा।

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