संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने पाकिस्तान के अनुरोध पर बंद कमरे में बैठक की, जिसमें परिषद के सदस्यों ने इस्लामाबाद से कड़े सवाल पूछे और उसके "झूठे बयान" को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार, UNSC सदस्यों ने बैठक के दौरान पहलगाम आतंकी हमले का मुद्दा उठाया और पाकिस्तान से पूछा कि क्या लश्कर-ए-तैयबा इस हमले में शामिल था। परिषद ने 22 अप्रैल के हमले की व्यापक रूप से निंदा की और जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया।
सूत्रों ने बताया कि परिषद के कई सदस्यों ने पहलगाम में पर्यटकों को उनकी धार्मिक आस्था के आधार पर निशाना बनाए जाने का मुद्दा उठाया। परिषद ने पाकिस्तान की मिसाइल टेस्टिंग और परमाणु बयानबाजी पर भी चिंता जताई और इन्हें संघर्ष "बढ़ाने वाले फैक्टर" करार दिया।
पाकिस्तान की कोशिशें नाकाम
कथित तौर पर, स्थिति को अंतर्राष्ट्रीय बनाने की पाकिस्तान की कोशिश फेल हो गई, क्योंकि सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान को भारत के साथ इस मुद्दे को द्विपक्षीय रूप से सुलझाने की सलाह दी।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने बंद कमरे में इस मुद्दे पर चर्चा की, जिसमें राजदूतों ने संयम बरतने और संवाद करने का आह्वान किया।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मई महीने के लिए अध्यक्ष यूनान ने पाकिस्तान के अनुरोध पर सोमवार को बैठक तय की थी। पाकिस्तान वर्तमान में सुरक्षा परिषद का एक अस्थायी सदस्य है।
बैठक जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों के 26 लोगों की हत्या किए जाने के कुछ दिनों बाद हुई। पहलगाम हमले की घटना के बाद से भारत में आक्रोश फैल गया है।
PM मोदी की कोशिशों का नतीजा
सुरक्षा परिषद की यह बैठक सोमवार दोपहर को लगभग डेढ़ घंटे तक चली। बैठक ‘UNSC चैंबर’ में नहीं बल्कि उसके बगल के कन्सल्टिंग रूम में हुई।
सुरक्षा परिषद ने बैठक के बाद कोई बयान जारी नहीं किया लेकिन पाकिस्तान ने दावा किया कि उसके उद्देश्य ‘‘काफी हद तक पूरे हो गए’’।
सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार की UNSC के सदस्य देशों के साथ लगातार संपर्क में रहने की भारत की कोशिशों का नतीजा है कि पाकिस्तान में वहां मुंह की खानी पड़ी। पीएम मोदी ने सुरक्षा परिषद के पांच में से चार स्थायी सदस्यों के नेताओं से बात की थी।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी चीन और पाकिस्तान को छोड़कर सभी परिषद सदस्यों से बात की थी। अपने कॉल में जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि "इसके अपराधियों, समर्थकों और योजनाकारों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए"।