युद्ध के बीच इस्लामाबाद आएंगे ट्रंप! US-ईरान समझौता हुआ तो खुद होंगे शामिल; पाकिस्तान में रचेगा इतिहास

Islamabad Talks: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में अमेरिकी टीम पहले ही मिशन पर निकल चुकी है। अगर ट्रंप इस वार्ता में शामिल होते हैं, तो यह सीधे तौर पर उनकी 'आर्ट ऑफ द डील' का सबसे बड़ा उदाहरण होगा। पूरी दुनिया की नजरें अब इस्लामाबाद की उन बंद कमरों वाली बैठकों पर हैं

अपडेटेड Apr 21, 2026 पर 12:40 PM
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अगर दोनों पक्ष किसी समझौते के करीब पहुंचते हैं, तो ट्रंप खुद वर्चुअली या व्यक्तिगत रूप से इस बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं

Trump May Join US-Iran Talks: ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध को खत्म करने की दिशा में बुधवार का दिन बेहद निर्णायक साबित होने वाला है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अगर इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता किसी नतीजे पर पहुंचती है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद इस प्रोसेस में शामिल हो सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, या तो फोन कॉल पर या खुद मिलकर ट्रंप इस समझौते को अंतिम रूप देंगे।

पर्सनली या वर्चुअली हो सकते हैं शामिल

पाकिस्तानी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को होने वाली दूसरे दौर की बातचीत के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अगर दोनों पक्ष किसी समझौते के करीब पहुंचते हैं, तो ट्रंप खुद वर्चुअली या व्यक्तिगत रूप से इस बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप एक ऐसा समझौता चाहते हैं जो न केवल युद्ध रोके, बल्कि तेल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाए और ग्लोबल मार्केट को स्थिर करे।


'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर'

बातचीत के बीच ट्रंप ने ईरान की परमाणु क्षमता को लेकर एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'पिछले साल किए गए अमेरिकी हमलों ने ईरान के परमाणु स्थलों को 'मिट्टी' में मिला दिया है। ट्रंप ने ईरान के यूरेनियम भंडार को 'न्यूक्लियर डस्ट' करार देते हुए कहा कि अब इसे फिर से खोदकर निकालना या इस्तेमाल करना ईरान के लिए एक बहुत लंबी और कठिन प्रक्रिया होगी।

'होर्मुज' बनाम 'सेंक्शंस': क्या है दोनों की मांग?

इस्लामाबाद की मेज पर दोनों देशों की अपनी-अपनी शर्तें और मजबूरियां हैं। ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपने रणनीतिक नियंत्रण का इस्तेमाल कर रहा है ताकि वह अमेरिका से कड़ें आर्थिक प्रतिबंधों में ढील पा सके। वहीं वाशिंगटन का रुख साफ है कि, ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अपनी सभी क्षमताओं को हमेशा के लिए छोड़ना होगा और समुद्री रास्तों को सुरक्षित करना होगा।

वार्ता की राह में चुनौतियां

भले ही अमेरिका को भरोसा है कि बातचीत सही दिशा में है, लेकिन तेहरान के भीतर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान की टीम वार्ता के लिए रवाना तो हो रही है, लेकिन वहां का सैन्य नेतृत्व अभी भी कई मुद्दों पर अड़ा हुआ है। युद्धविराम की समय सीमा खत्म होने को है, ऐसे में यह 'करो या मरो' वाली स्थिति है।

कूटनीति का सबसे बड़ा टेस्ट

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में अमेरिकी टीम पहले ही मिशन पर निकल चुकी है। अगर ट्रंप इस वार्ता में शामिल होते हैं, तो यह सीधे तौर पर उनकी 'आर्ट ऑफ द डील' का सबसे बड़ा उदाहरण होगा। पूरी दुनिया की नजरें अब इस्लामाबाद की उन बंद कमरों वाली बैठकों पर हैं, जो आने वाले दशकों के लिए दुनिया का भविष्य तय करेंगी।

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