US Troop Casualties: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने ईरान के सबसे महत्वपूर्ण खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की सैन्य योजना को सिरे से खारिज कर दिया था। ट्रंप को डर था कि इस खतरनाक मिशन में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मारे जा सकते हैं। यही वजह रही कि आखिरी वक्त में ट्रंप ने पीछे मुड़ने का फैसला किया।
खर्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है। ईरान के कुल तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इसी टर्मिनल से होकर गुजरता है। अगर अमेरिका इस पर कब्जा कर लेता, तो उसके पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान पर दबाव बनाने की बहुत बड़ी ताकत आ जाती। अमेरिका का उद्देश्य ईरान को मजबूर करना था कि वह होर्मुज का रास्ता व्यापार के लिए फिर से खोल दे।
अमेरिकी सैनिक आसान निशाना बन जाएंगे'
रिपोर्ट के मुताबिक, जब सैन्य सलाहकारों ने खर्ग द्वीप पर सेना उतारने का प्रस्ताव दिया, तो ट्रंप ने सैनिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। ट्रंप ने कथित तौर पर कहा, 'वे वहां आसान निशाना बन जाएंगे।' उन्हें डर था कि ईरानी सेना वहां अमेरिकी सैनिकों को चारों ओर से घेरकर भारी नुकसान पहुंचा सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप के दिमाग में 1979 के 'ईरान बंधक संकट' की यादें ताजा थीं, जिसके कारण वे किसी भी बड़ी सैन्य कार्रवाई से हिचकिचा रहे थे। इन सब के साथ ईरान ने भी अमेरिका को किसी प्रकार की जमीनी कार्रवाई पर जहन्नुम जैसा परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी हुई थी।
अमेरिकी विमान गिरने पर भड़के ट्रंप
शांति और संयम के बीच एक ऐसी घटना भी हुई जिसने ट्रंप को गुस्से से भर दिया। ईरान के ऊपर एक अमेरिकी विमान को मार गिराया गया, जिसके बाद दो अमेरिकी पायलट लापता हो गए। ट्रंप ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए तुरंत सैन्य प्रतिक्रिया और पायलटों को ढूंढने के आदेश दिए। इसके बाद अमेरिका ने खर्ग द्वीप पर मौजूद सैन्य बुनियादी ढांचे पर भारी बमबारी भी की थी।
पाकिस्तान बना मध्यस्थ, बातचीत की उम्मीद
तनाव के इस माहौल में पर्दे के पीछे कूटनीति भी काम कर रही है। पाकिस्तान के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चल रही है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों का मानना है कि जल्द ही कोई बड़ा समाधान निकल सकता है। अगले दौर की बातचीत फिर से पाकिस्तान में होने की उम्मीद है।
डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने समुद्री रास्ता ब्लॉक करना जारी रखा, तो अमेरिका और भी घातक हवाई हमले कर सकता है। हालांकि, जमीन पर सेना उतारने से ट्रंप के इनकार ने यह साफ कर दिया है कि वे सीधा युद्ध नहीं चाहते।