ट्रंप कहें हां, ईरान कहे ना... क्या सच में जंग रोकने पर चल रही बातचीत? जानें अब-तक क्या कुछ हुआ

US Iran War Talks: ईरान का कहना है कि कुछ “दोस्त देशों” के जरिए अमेरिका ने बातचीत का संदेश भेजा है। यानी सीधे नहीं, बल्कि दूसरे देशों के जरिए बात हो रही है। पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सीधे नहीं, बल्कि ओमान जैसे देशों के जरिए होती रही है

अपडेटेड Mar 24, 2026 पर 9:02 PM
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US Iran War Talks: ट्रंप कहें हां, ईरान कहे न... क्या सच में जंग रोकने पर चल रही बातचीत?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अचानक अपना रुख बदल दिया है। पहले वो ईरान के खिलाफ युद्ध बढ़ाने की बात कर रहे थे, लेकिन अब कह रहे हैं कि युद्ध खत्म करने के लिए “बहुत अच्छी” बातचीत चल रही है। हालांकि, ईरान ने ऐसी किसी बातचीत से इनकार किया है।

क्या सच में बातचीत हो रही है?

ट्रंप के मुताबिक हां, लेकिन तेहरान (ईरान) के मुताबिक नहीं। असल में यह इस बात पर निर्भर करता है कि “बातचीत” को कैसे समझा जाए।


ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका एक ऐसे ईरानी नेता से बात कर रहा है, जो बहुत सम्मानित है और काफी समझदार भी है। लेकिन उन्होंने साफ किया कि वो ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई तो नहीं हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह नेता मोहम्मद बगेर गालिबफ हो सकते हैं, जो ईरान की संसद के स्पीकर हैं और वहां के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं। लेकिन गालिबफ ने सोशल मीडिया पर कहा कि कोई बातचीत नहीं हो रही और यह “फेक न्यूज” है, जिसका मकसद तेल और फाइनेंशियल मार्केट को प्रभावित करना है।

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ के बीच हाल में सीधी बात हुई है, लेकिन इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।

तो फिर क्या चल रहा है?

ईरान का कहना है कि कुछ “दोस्त देशों” के जरिए अमेरिका ने बातचीत का संदेश भेजा है। यानी सीधे नहीं, बल्कि दूसरे देशों के जरिए बात हो रही है।

पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सीधे नहीं, बल्कि ओमान जैसे देशों के जरिए होती रही है। अब मिस्र, पाकिस्तान और शायद तुर्किये भी बीच में संदेश पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बात की है और कहा कि उनका देश शांति के लिए मदद करना चाहता है।

बातचीत में क्या मुद्दे होंगे?

सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है, जिस पर 2003 से विवाद चल रहा है।

ट्रंप चाहते हैं कि ईरान यूरेनियम को और समृद्ध (enrich) न करे, लेकिन जो पहले से बना हुआ है, उसे लेकर भी बात करना चाहते हैं।

ईरान ने पहले यह भी ऑफर दिया था कि वो अपने यूरेनियम का स्तर कम कर देगा और अंतरराष्ट्रीय एजेंसी के निरीक्षकों को वापस आने देगा।

लेकिन अब, दो बार हमले झेलने के बाद, ईरान कुछ शर्तें रख सकता है- जैसे आगे हमला न करने की गारंटी, नुकसान का मुआवजा और उस पर लगे प्रतिबंध हटाना।

क्योंकि ईरान के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पकड़ है, जो दुनिया के तेल-गैस सप्लाई का बड़ा रास्ता है। इस वजह से उसकी बातचीत में ताकत बढ़ गई है।

क्या बातचीत सफल होगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि अभी भरोसा लगभग खत्म हो चुका है और दोनों पक्षों के बीच दूरी बहुत ज्यादा है। ऐसे में समझौता करना मुश्किल दिख रहा है।

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि ट्रंप सिर्फ समय खरीद रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर अमेरिका आगे कोई बड़ा कदम (जैसे सैन्य कार्रवाई) उठा सके।

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