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ईरान में सैनिक भेजकर बड़ी गलती दोहराने जा रहा है अमेरिका! इराक-अफगानिस्तान में हुआ था बुरा हाल

साल 2001 में हुए 9/11 आतंकी हमला के बाद, अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों ने ‘ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम’ के तहत अफगानिस्तान में बड़ी संख्या में सैनिक तैनात किए थे। 2011 में, जब यह अभियान अपने चरम पर था, तब अमेरिका के करीब 1 लाख सैनिक बगराम से लेकर कंधार तक फैले कम से कम 10 सैन्य ठिकानों पर तैनात थे। 2001 से 2021 के बीच, अमेरिका ने तालिबान को हराने और अफगानिस्तान की सरकारी व्यवस्था को फिर से मजबूत करने के लिए वहां करीब 8 लाख सैनिक भेजे

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 30, 2026 पर 3:08 PM
ईरान में सैनिक भेजकर बड़ी गलती दोहराने जा रहा है अमेरिका! इराक-अफगानिस्तान में हुआ था बुरा हाल
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जंग बीते एक महीने से जारी है।

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जंग बीते एक महीने से जारी है। फिलहाल ये जंग और भी खतरनाक होती दिख रही है। इस जंग के बीच अमेरिका ईरान पर संभावित रूप से जमीनी हमला करने के लिए मिडिल ईस्ट में करीब 10 हजार सैनिक भेजने की प्लानिंग कर रहा है। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका की नौसेना का एक जहाज जिसमें करीब 2,500 अमेरिकी सैनिक सवार हैं, पश्चिम एशिया पहुंच गया है। अगर अमेरिका ईरान पर जमीनी हमला करता है तो यह जारी तनाव में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।

अमेरिका कर रहा बड़ा प्लानिंग 

हालांकि बीते चार हफ्ते से जारी इस जंग सीजफायर को लेकर बातचीत की खबरें भी सामने आ रही हैं, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ईरान में खास जमीनी ऑपरेशन्स के लिए इमरेंजसी प्लान बना रहा है। इन योजनाओं में होर्मुज के पास संभावित कार्रवाई और खर्ग द्वीप पर कब्ज़ा करने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। हालांकि, ये योजनाएं काफी जोखिम भरी मानी जा रही हैं और इनके सफल होने की कोई पक्की गारंटी नहीं है। पहले भी अमेरिका ने इराक और अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की थी। वहां कुछ लक्ष्य जरूर हासिल हुए, जैसे सद्दाम हुसैन को हटाना और ओसामा बिन लादेन को मार गिराना, लेकिन उसके बड़े उद्देश्य पूरी तरह सफल नहीं हो पाए। ईरान पर जमीनी हमला होने की स्थिति में होर्मुज को नुकसान पहुंचने का खतरा है और अमेरिकी सैनिकों के जान जाने का भी खतरा है।

अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों हुआ था ऐसा हाल

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