'वेनेजुएला के सैनिक करने लगे खून की उल्टी, नाक से बहने लगा खून'! अमेरिका ने मादुरो के ऑपरेशन में इस्तेमाल किया 'रहस्यमयी हथियार'
US Strike Venezuela: एक चौंका देने वाले इंटरव्यू में, हमले के समय वेनेजुएला में तैनात गार्ड ने बताया कि कैसे अमेरिकी सेना ने एक भी सैनिक खोए बिना सैकड़ों लड़ाकों को मार गिराया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सैनिकों ने ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया था, जो उन्होंने पहले कभी न देखी थी और न ही सुनी थी
अमेरिका ने मादुरो के ऑपरेशन में इस्तेमाल किया 'रहस्यमयी हथियार'
पिछले दिनों वेनेजुएला पर आधी रात में अमेरिका के मिलिट्री एक्शन और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने पूरी दुनिया को चौंका दिया था। उससे भी ज्यादा चौंकाने वाला खुलासा तो अब हुआ है, क्योंकि इस ऑपरेशन की इंटरनल डिटेल सामने आ गई है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने शनिवार को X पर एक प्रत्यक्षदर्शी का बयान शेयर किया, जिसमें उसने बताया कि ऑपरेशन के दौरान अमेरिका ने एक "शक्तिशाली रहस्यमयी हथियार" का इस्तेमाल किया, जिसने "वेनेजुएला के सैनिकों को घुटनों पर ला दिया, उनकी नाक से खून बहने लगा और वे खून की उल्टी करने लगे।"
एक चौंका देने वाले इंटरव्यू में, हमले के समय वेनेजुएला में तैनात गार्ड ने बताया कि कैसे अमेरिकी सेना ने एक भी सैनिक खोए बिना सैकड़ों लड़ाकों को मार गिराया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सैनिकों ने ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया था, जो उन्होंने पहले कभी न देखी थी और न ही सुनी थी।
गार्ड ने द न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया, “हम सतर्क थे, लेकिन अचानक बिना किसी कारण के हमारे सभी रडार सिस्टम बंद हो गए। इसके बाद हमने देखा कि हमारे ठिकानों के ऊपर बहुत सारे ड्रोन उड़ रहे थे। हमें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें।”
उसने बताया कि कुछ ही पल बाद, मुट्ठी भर हेलीकॉप्टर दिखाई दिए - उनके अनुमान के अनुसार "मुश्किल से आठ", जिन्होंने करीब सिर्फ 20 अमेरिकी सैनिकों को उस इलाके में उतारा।
उसने बताया कि वे कुछ लोग बंदूकों से कहीं ज्यादा पावरफुल हथियार लेकर आए थे, जिसे उसने "रहस्यमयी हथियार" कहा। गार्ड ने याद करते हुए कहा, "वे तकनीकी रूप से बहुत एडवांस थे। वे देखने में ऐसे नहीं थे, जैसे हमने पहले कभी उनका सामना किया हो।" इसके बाद जो हुआ वो एक "नरसंहार" था।
उन्होंने कहा, “हम सैकड़ों थे, लेकिन हमारे पास कोई मौका नहीं था।” उन्होंने आगे कहा, “वे इतनी सटीकता और स्पीड से गोली चला रहे थे कि ऐसा लग रहा था जैसे हर सैनिक एक मिनट में 300 गोलियां चला रहा हो।”
गार्ड ने बताया कि वह हथियार आज भी उन्हें डराता है। इस चश्मदीद गवाह की कहानी को बाद में लेविट ने सोशल मीडिया पर शेयर किया और कैप्शन लिखा- जो भी कर रहे हो उसे रोककर इसे पढ़ो…
'साइबर-काइनेटिक' युद्ध तकनीक का इस्तेमाल
अमेरिका ने इस हमले में न केवल अपनी पारंपरिक ताकत दिखाई, बल्कि 'साइबर-काइनेटिक' युद्ध तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया।
हमले की शुरुआत बमबारी से नहीं, बल्कि कंप्यूटर कोड से हुई। अमेरिका की 'साइबर कमांड' ने वेनेजुएला के 'गुरी डैम' और पावर ग्रिड पर डिजिटल अटैक किया।
इससे पूरे देश की बिजली गुल हो गई और वेनेजुएला का डिफेंस कम्युनिकेशन सिस्टम (संचार व्यवस्था) ठप हो गया। अमेरिका ने इसके लिए महीनों पहले से 'मैलवेयर' प्लांट कर दिए थे, ताकि हमले के वक्त दुश्मन को अंधेरे में रखा जा सके।
वेनेजुएला के सैनिकों के दिमाग को किया कमजोर!
साथ ही अमेरिका ने अपने EA-18G Growler विमानों के जरिए वेनेजुएला के रेडियो और रडार सिग्नल्स को जैम कर दिया। इससे वेनेजुएला के सैनिक आपस में संपर्क नहीं कर पाए और उनके रडार स्क्रीन सिर्फ सफेद दिख रही थी।
हमले के साथ-साथ, अमेरिका ने वेनेजुएला के सैनिकों के मोबाइल फोन पर डायरेक्ट मैसेज भेजे और सोशल मीडिया के जरिए उन्हें सरेंडर करने के लिए प्रेरित किया। इसे 'कॉग्निटिव वारफेयर' कहा जाता है, जहां दुश्मन के दिमाग को ही कमजोर कर दिया जाता है।