Strait of Hormuz: ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज से तेल आपूर्ति बहाल करने के लिए करीब सात देशों से अपने युद्धपोत तैनात करने की अपील की थी, लेकिन उनके प्रमुख सहयोगियों ने इस पर बेहद ठंडी प्रतिक्रिया दी है। ऑस्ट्रेलिया ने ट्रंप के अनुरोध को सिरे से खारिज कर दिया है और जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई सहयोगियों ने भी कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी है।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ट्रंप के साथ बातचीत में होर्मुज को फिर से खोलने की आवश्यकता पर तो सहमति जताई, लेकिन युद्धपोत भेजने पर कोई वादा नहीं किया। स्टार्मर ने सोमवार को होने वाली एक बैठक में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ इस संकट पर चर्चा जारी रखने का फैसला किया है।
'हम जहाज नहीं भेज रहे': ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया के कैबिनेट मंत्री कैथरीन किंग ने 'ABC' से बात करते हुए कहा, 'हम होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई जहाज नहीं भेज रहे हैं। हम जानते हैं कि यह रास्ता कितना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह ऐसी चीज नहीं है जिसमें हम योगदान दे रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया को ऐसा करने के लिए आधिकारिक तौर पर नहीं कहा गया है और न ही उसकी ऐसी कोई योजना है।
जापान और दक्षिण कोरिया बोले- 'अभी कोई विचार नहीं'
ट्रंप के एशियाई सहयोगियों जापान और दक्षिण कोरिया ने भी इस मामले में बहुत सावधानी बरती है। जापान के वरिष्ठ सांसद सनाए ताकाची ने स्पष्ट किया कि जापान फिलहाल सुरक्षा अभियानों के लिए अपने युद्धपोत भेजने पर विचार नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि जापान अपने कानूनी दायरे के भीतर विकल्पों की जांच कर रहा है, लेकिन अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।
वहीं दक्षिण कोरिया ने कहा कि वह किसी भी निर्णय से पहले वाशिंगटन के साथ विचार-विमर्श जारी रखेगा। राष्ट्रपति कार्यालय ने नोट किया कि कोई भी कदम उठाने से पहले स्थिति की सावधानीपूर्वक समीक्षा की जाएगी।
'आपकी जरूरत, तो आप ही रक्षा करें'
एयर फोर्स वन में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने उन देशों पर निशाना साधा जो मिडिल ईस्ट के कच्चे तेल पर बहुत अधिक निर्भर हैं। ट्रंप ने विशेष रूप से चीन का नाम लेते हुए कहा कि चीन अपनी जरूरत का सबसे ज्यादा तेल होर्मुज के रास्ते मंगवाता है, इसलिए उसे इस रास्ते की रक्षा खुद करनी चाहिए। ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका अब दूसरों की तुलना में इस रास्ते पर बहुत कम निर्भर है, इसलिए संबंधित देशों को 'अपने क्षेत्र' की रक्षा खुद करनी चाहिए।
वैश्विक बाजार में हाहाकार!
ट्रंप की अपीलों और सहयोगियों के इनकार के बीच तेल की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं। दुनियाभर में कारोबार होने वाले तेल का लगभग 20% यानी करीब पांचवां हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। किसी भी देश से ठोस प्रतिबद्धता न मिलने के कारण अब वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा संकट और गहराने की आशंका है।