HUL Share Price: देश में FMCG सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी हिंदुस्तान यूनीलीवर लिमिटेड (HUL) के शेयरों ने इस साल निगेटिव रिटर्न दिया है। इस साल अब तक यह करीब 3 फीसदी फिसला है। ब्रोकरेज फर्म HSBC ने अब इसकी रेटिंग भी डाउनग्रेड कर होल्ड कर दी है और टारगेट प्राइस भी 2950 रुपये से घटाकर 2700 रुपये कर दिया है। यह टारगेट सोमवार 23 अक्टूबर को बीएसई पर बंद भाव 2484.60 रुपये से करीब 8.67 फीसदी अपसाइड है जबकि इससे पहले जो टारगेट था, वह इस लेवल से 18.73 फीसदी अपसाइड था। ब्रोकरेज के मुताबिक कंपनी कंपनी पिछले पांच साल से मार्केट में पिछड़ रही है।
ब्रोकरेज को क्यों दिख रही HUL में सीमित तेजी
इस वित्त वर्ष 2023-24 की दूसरी तिमाही जुलाई-सितंबर में इसके नतीजे कमजोर रहे जिसने इसकी दिक्कतें और बढ़ाई हैं। इसके पोर्टफोलियो में कमजोरी बनी हुई है। HSBC को HUL में तब तक सीमित तेजी ही दिख रही है, जब तक कि मार्केट सेंटिमेंट में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखे। ब्रोकरेज HSBC के एनालिस्ट अमित सचदेवा के मुताबिक कंपनी की ग्रोथ सुस्त हुई है और स्ट्रक्चरल मार्जिन की संभावनाएं धीमी हुई हैं। ऐसे में रेटिंग में कटौती की चरण आगे भी जारी रहेगा। क्षेत्रीय और स्थानीय प्लेयर्स से बढ़ते कॉम्पटीशन के चलते HUL का मार्केट में दबदबा कम हो रहा है।
अब तक कंपनी की ग्रोथ को होमकेयर से तगड़ा सपोर्ट मिला है और ब्रोकरेज के मुताबिक हाई बेस और लोकल/क्षेत्रीय कंपनियों से तगडे़ कॉम्पटीशन के चलते यह चरम स्तर पर पहुंच चुका है। इसके अलावा फूड्स ग्रोथ भी कई तिमाहियों से खास नहीं है और ब्यूटी और पर्सनल केयर सेगमेंट भी चुनौतियों से जूझ रहा है। इन सब वजहों से ब्रोकरेज इसमें सीमित तेजी के आसार देख रहा है। यहां नीचे ग्राफ में देख सकते हैं कि इसकी वॉल्यूम ग्रोथ कैसे गिर रही है।
कितना तेज बढ़ रहा कॉम्पटीशन
HUL के सीईओ रोहित जावा के मुताबिक स्थानीय प्लेयर्स की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। चाय की बात करें तो छोटे प्लेयर्स की मार्केट वैल्यू बड़े प्लेयर्स की तुलना में 1.4 गुना तो डिटर्जेंट में 6 गुना बढ़ चुकी है। इसे लेकर कंपनी के CFO रितेश तिवारी का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में गिरावट का फायदा सीधे पैकेट की कीमतों में कमी करके ग्राहकों को दिया जा रहा है, बजाय इसका वजन बढ़ाने के।
सितंबर तिमाही में कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो इसका शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 3.86 फीसदी उछलकर 2717 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह ब्रोकरेज के अनुमान से अधिक थी क्योंकि चार ब्रोकरेज ने औसतन 2540.9 करोड़ रुपये के शुद्ध मुनाफे का अनुमान लगाया था।
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