स्ट्रॉबेरी की खेती भारत में तेजी से लोकप्रिय होती जा रही है, और झारखंड के नेतरहाट और पलामू जैसे क्षेत्रों में किसानों का उत्साह इसे लेकर देखते ही बनता है। इस फल की खेती न केवल मुनाफ़े का ज़रिया बन रही है, बल्कि ये किसानों को बाजार में नई संभावनाएं भी देती है। हालांकि, स्ट्रॉबेरी की सही और भरपूर उपज पाने के लिए केवल बुवाई करना ही पर्याप्त नहीं है। विशेषकर सर्दियों में पौधों की सुरक्षा और फलों की गुणवत्ता बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। इस समय तापमान में गिरावट और मिट्टी की नमी के कारण पौधों को ठंड और संक्रमण से बचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में मल्चिंग एक बेहद प्रभावी और किफायती उपाय बनकर सामने आता है।
