Budget 2025: सामाजिक सुरक्षा, फिस्कल डेफिसिट और इकोनॉमिक ग्रोथ पर रहेगा निर्मला सीतारमण का फोकस

सरकार सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने के लिए यूनियन बजट में बड़ा ऐलान कर सकती है। ILO की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी सामाजिक सुरक्षा पर सरकार का खर्च काफी कम है। इंडिया जैसे देश में सामाजिक सुरक्षा पर फोकस बढ़ाना इसलिए भी जरूरी है कि वर्कफोर्स का बड़ा हिस्सा अब भी असंगठित क्षेत्र के तहत आता है

अपडेटेड Dec 26, 2024 पर 11:24 AM
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साल 2047 तक भारत के विकसित देश बनने के लिए कम से कम 7-8 फीसदी की जीडीपी ग्रोथ जरूरी है। इसलिए सरकार बजट में ग्रोथ बढ़ाने वाले उपायों पर फोकस बढ़ा सकती है।

यूनियन बजट 2025 में सामाजिक सुरक्षा, सरकार की वित्तीय सेहत और इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाने के उपायों पर सरकार का फोकस हो सकता है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2025 को यूनियन बजट पेश करेंगी। यह बजट ऐसे वक्त में आ रहा है, जब जीडीपी ग्रोथ में तेज गिरावट आई है। इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ घटकर 5.4 फीसदी पर आ गई। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तमंत्री यूनियन बजट में जीाडीपी ग्रोथ बढ़ाने के लिए उपायों का ऐलान कर सकती हैं।

अभी सामाजिक सुरक्षा पर सरकार का खर्च काफी कम

सरकार ऐसी जगह खर्च करना चाहेगी, जिससे उसे सबसे ज्यादा फायदा हो। इसका मतलब है कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने के साथ ही सरकार का फोकस सोशल सिक्योरिटी (Social Security) बढ़ाने पर होगा। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन (ILO) की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल प्रोटेक्शन पर अभी सरकार का खर्च काफी कम है। सोशल सिक्योरिटी पर फोकस बढ़ाना इसलिए भी जरूरी है कि अभी वर्कफोर्स का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र के तहत आता है। 2020 में कोविड के बाद से सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की मुसीबतें बढ़ी हैं। ऐसे में सरकार सोशल सिक्योरिटी पर खर्च बढ़ाने का ऐलान यूनियन बजट (Union Budget 2025) में कर सकती है।


फिस्कल डेफिसिट 4.5 फीसदी लाने पर रहेगा फोकस

सरकार का फोकस अपनी वित्तीय सेहत ठीक करने पर बना रहेगा। फाइनेंस मिनिस्ट्री के डॉक्युमेंट में ऐसा कहा गया है। पिछले कुछ सालों में सरकार ने फिस्कल डेफिसिट को FRBM के तय लक्ष्य तक लाने पर फोकस बढ़ाया है। 1 फरवरी, 2025 को पेश होने वाले बजट में सरकार FY26 में फिस्कल डेफिसिट को 4.5 फीसदी तक लाने का टारगेट तय कर सकती है। सरकार ने FY25 के लिए फिस्कल डेफिसिट का 5.9 फीसदी लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य के हासिल हो जाने की उम्मीद है।

ग्रोथ बढ़ाने वाले उपायों का ऐलान

इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ घटकर 5.4 फीसदी पर आ जाने से सरकार चिंतित है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि मई में लोकसभा चुनाव और उसके बाद तेज गर्मी और मानसून का बारिश का असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ा। इस वजह से सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ में गिरावट आई।

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विकसित देश बनने के लिए तेज ग्रोथ जरूरी

साल 2047 तक भारत के विकसित देश बनने के लिए कम से कम 7-8 फीसदी की जीडीपी ग्रोथ जरूरी है। इसलिए सरकार बजट में ग्रोथ बढ़ाने वाले उपायों पर फोकस बढ़ा सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्रोथ बढ़ाने के लिए रोजगार के मौके बढ़ाने पर फोकस करना होगा। इससे उपलब्ध वर्कफोर्स का इस्तेमाल हो सकेगा। इसलिए सरकार बजट में मैन्युफैक्चरिंग सहित उन सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए स्कीम का ऐलान कर सकती है, जिनमें श्रम का ज्यादा इस्तेमाल होता है।

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