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Budget 2026: कैपिटल गेन टैक्स में बदलाव, इक्विटी और म्यूचुअल फंड के लिए बने रोडमैप

Budget 2026: पिछले करीब दो दशकों में भारत की कैपिटल गेन टैक्स व्यवस्था में बड़ा और अहम बदलाव देखने को मिला है। एक समय ऐसा था जब कैपिटल गेन को लगभग कर-मुक्त माना जाता था, लेकिन समय के साथ सरकार ने इस व्यवस्था को ज्यादा संरचित, पारदर्शी और संतुलित बनाया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 30, 2026 पर 3:12 PM
Budget 2026: कैपिटल गेन टैक्स में बदलाव, इक्विटी और म्यूचुअल फंड के लिए बने रोडमैप
Budget 2026: पिछले करीब दो दशकों में भारत की कैपिटल गेन टैक्स व्यवस्था में बड़ा और अहम बदलाव देखने को मिला है।

Budget 2026: पिछले करीब दो दशकों में भारत की कैपिटल गेन टैक्स व्यवस्था में बड़ा और अहम बदलाव देखने को मिला है। एक समय ऐसा था जब कैपिटल गेन को लगभग कर-मुक्त माना जाता था, लेकिन समय के साथ सरकार ने इस व्यवस्था को ज्यादा संरचित, पारदर्शी और संतुलित बनाया है। इसका मकसद साफ रहा है—एक तरफ सरकार की राजस्व जरूरतों को पूरा करना और दूसरी तरफ निवेशकों का भरोसा बनाए रखना। नीति-निर्माताओं ने लगातार इस बात की कोशिश की है कि टैक्स सिस्टम ऐसा हो जो निवेश को हतोत्साहित न करे, बल्कि भारत को एक भरोसेमंद और आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में पेश करे।

बदलता हुआ परिदृश्य

परंपरागत रूप से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर 20 प्रतिशत टैक्स लगता था और इसमें इंडेक्सेशन का गेन दिया जाता था। इंडेक्सेशन से महंगाई के असर को कम करने में मदद मिलती थी, जिससे वास्तविक कर बोझ घट जाता था। लेकिन वर्ष 2004 में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) लागू होने के साथ यह व्यवस्था पूरी तरह बदल गई। इसके बदले सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों और इक्विटी-उन्मुख म्यूचुअल फंड्स पर, जिन पर STT चुकाया गया हो, होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन को पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया गया।

यह कदम भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। इससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ी, लेनदेन आसान हुआ और घरेलू के साथ-साथ विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हुआ। इक्विटी बाजारों में गहराई आई और निवेश का दायरा तेजी से बढ़ा।

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