यूनियन बजट 2026 में कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट को बढ़ावा देने वाले उपायों का ऐलान हो सकता है। भारत दुनिया में कई कमोडिटीज के उत्पादन में पहले या दूसरे नंबर पर है। लेकिन, भारत का कमोडिटी डेरिवेटिव मार्केट दुनिया के दूसरे कमोडिटीज डेरिवेटिव्स मार्केट से पीछ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार की मदद मिलने पर इस मार्केट की ग्रोथ बढ़ सकती है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट में रिटेल का पार्टिसिपेशन ज्यादा है। इंस्टीट्यूशनल पार्टिसिपेशन को बढ़ावा देने के उपाय होने चाहिए। इससे म्यूचुअल फंड्स, एआईएप, एफपीआई, पीएमएस का पार्टिसिपेशन बढ़ेगा। इससे मार्केट में उतार-चढ़ाव में कमी आएगी और प्राइस डिस्कवरी में भी मदद मिलेगी।
दुनिया के कई देशों में कमोडिटीज मार्केट के टर्नओवर में ऑप्शंस की काफी ज्यादा हिस्सेदारी है। भारत में भी कमोडिटीज डेरिवेटिव्स में ऑप्शंस की हिस्सेदारी बढ़ रही है। यूनियन बजट 2026 में सरकार इसे बढ़ावा देने के उपाय कर सकती है। यह कंपनियों, प्रोसेसर्स, ज्वेलर्स आदि के लिए हेजिंग का बड़ा टूल हो सकता है।
कमोडिटी मार्केट के पार्टिसिपेंट्स खासकर नॉन-एग्री कॉन्ट्रैक्ट्स के मामले में सीटीटी यानी कमोडिटी ट्रांजेक्शन टैक्स बड़ी बाधा है। गोल्ड, सिल्वर, क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस और बेस मेटल्स से जुड़े ट्रांजेक्शन पर सीटीटी लगता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसमें कमी करने या इससे हटाने से मार्केट में वॉल्यूम बढ़ सकता है।
जियोपॉलिटिकल रिस्क बढ़ने, बड़ी घटनाओं और एक्सपायरीज पर कमोडिटीज मार्केट में मार्जिन काफी बढ़ जाता है। इससे लिक्विडिटी पर दबाव बढ़ जाता है। दुनिया के दूसरे देशों के कमोडिटीज मार्केट के मार्जिन फ्रेमवर्क को ध्यान में रख मौजूदा नियमों में बदलाव किया जा सकता है। इससे मार्केट में पार्टिसिपेशन बढ़ेगा।
वित्तमंत्री निर्मला सीतामरण 1 फरवरी को Union Budget पेश करेंगी। यह उनका 9वां यूनियन बजट होगा। पहली बार 2019 में उन्होंने यूनियन बजट पेश किया था। बीते 8 बजटों में उन्होंने इकोनॉमी के हर सेक्टर का ध्यान बजट में रखा है। इस बार भी उनका फोकस टैक्सपेयर्स, किसान, महिलाओं और ग्रामीण इलाकों पर रहने की उम्मीद है।