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CBSE Board Exam: बोर्ड के पेपर में योग्यता आधारित सवालों का हिस्सा ज्यादा, तैयारी के लिए समझें पेपर की बनावट

CBSE Board Exam: बोर्ड परीक्षा के छात्र अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में लग गए हैं। इस समय सही रणनीति से तैयारी करने पर फोकस करना चाहिए। इसके लिए जरूरी है पेपर के पैटर्न पर फोकस करना। आइए समझें सीबीएसई बोर्ड के पेपर में सबसे ज्यादा फोकस किस तरह के सवालों पर करना चाहिए

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 27, 2025 पर 11:14 AM
CBSE Board Exam: बोर्ड के पेपर में योग्यता आधारित सवालों का हिस्सा ज्यादा, तैयारी के लिए समझें पेपर की बनावट
अच्छे नंबर लाने के लिए सही रणनीति से तैयारी करना भी जरूरी है।

CBSE Board Exam: बोर्ड की परीक्षा का समय नजदीक आ रहा है। इस समय छात्र अपना सिलेबस खत्म करने और फाइनल रिवीजन शुरू करने में पूरा जोर लगा रहे हैं। मगर, अच्छे नंबर लाने के लिए सही रणनीति से तैयारी करना भी जरूरी है। इसके लिए बोर्ड परीक्षा में आने वाले पेपर के पटर्न पर फोकस करना चाहिए। पेपर में जिस तरह के सवालों का हिस्सा सबसे ज्यादा होगा, उसी के हिसाब से तैयारी की जाए तो अच्छे नंबर आने से कोई नहीं रोक सकता है। छात्रों के अंदर बोर्ड परीक्षा का डर खत्म करने के लिए स्कूल भी पूरी मेहनत करने में लगे हुए हैं। बच्चों का विषयवार टेस्ट लिया जा रहा है। प्री बोर्ड परीक्षाओं में बोर्ड के पैटर्न पर पेपर भी इसी रणनीति का हिस्सा हैं। आइए समझें बोर्ड परीक्षा में पेपर का गणित और जवाब देने का तरीका

बोर्ड में 50% होंगे दक्षता आधारित सवाल

2026 की बोर्ड परीक्षा में सीबीएसई की 10वीं और 12वीं दोनों बोर्ड परीक्षाओं में 50% प्रश्न दक्षता आधारित (कंपीटेंसी बेस्ड क्वेश्चंस), 20% प्रश्न चयनात्मक उत्तर वाले (एमसीक्यू-बहुविकल्पीय) और 30% प्रश्न पारंपरिक वर्णनात्मक (शार्ट व लांग अंसर) के प्रश्न पूछे जाएंगे। स्कूलों में बोर्ड परीक्षार्थियों को बारीकी से तैयारी की जा रही है जिससे दक्षता आधारित प्रश्नपत्र में पूछे जाने वाले 50 प्रतिशत प्रश्नों का उत्तर परीक्षार्थी बिना कठिनाई के दे सकें।

व्यवस्था में है बदलाव

प्रश्नपत्रों में प्रश्नों के पैटर्न में किया गया बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप है। यह छात्रों के वास्तविक सीखने और समझ को आंकने का सशक्त प्रयास है। नई व्यवस्था में छात्रों से केवल रटकर लिखने की अपेक्षा नहीं होगी, बल्कि उनसे अपेक्षा रहेगी कि वे अपने ज्ञान को वास्तविक जीवन स्थितियों, केस स्टडी, स्रोत-आधारित प्रश्नों और विश्लेषणात्मक परिस्थितियों में लागू कर सकें। इसका सीधा अर्थ है कि प्रश्नों का स्वरूप अधिक व्यावहारिक, तार्किक और सोच-आधारित होगा। परीक्षार्थियों को उसी के अनुरूप प्रश्नों के उत्तर भी लिखने होंगे।

छात्रों को अब यह करना चाहिए

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