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UP Board Exam 2026: सीबीएसई बोर्ड की तरह यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियों में स्टेप मार्किंग से दिए जाएंगे अंक, जानें क्या है मूल्यांकन का यह तरीका?

UP Board Exam 2026: यूपी बोर्ड की परीक्षा समापन के करीब है और बोर्ड ने अब छात्रों की आंसर शीट चेक करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने छात्रों की कॉपियों की जांच में स्टेप मार्किंग अपनाने का निर्देश दिया है। आइए जानें क्या है स्टेप मार्किंग और छात्रों को क्या होगा फायदा

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 09, 2026 पर 10:08 AM
UP Board Exam 2026: सीबीएसई बोर्ड की तरह यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियों में स्टेप मार्किंग से दिए जाएंगे अंक, जानें क्या है मूल्यांकन का यह तरीका?
यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 12 मार्च को खत्म होने वाली हैं और 18 मार्च से मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू होगी।

UP Board Exam 2026: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने छात्रों की कॉपियों की जांच सीबीएसई या अन्य बोर्ड की तर्ज पर करने का निर्देश दिया है। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने परीक्षकों से साइंस और मैथ्स की आंसर शीट का मूल्यांकन करते समय स्टेप मार्किंग अपनाने को कहा है। उन्होंने कॉपियां चेक करने वाले टीचरों को इन विषयों में बाएं पेज पर लिखे जवाबों का भी ठीक से मूल्यांकन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने परीक्षकों से कहा है कि वे सिर्फ भाषा विषयों में भाषा संबंधी त्रुटियों की जांच करें। वहीं, गणित या विज्ञान जैसे विषयों का मूल्यांकन करते समय नरम रवैया अपनाएं। इन विषयों को जांचते समय छात्र द्वारा जवाब में लिखे गए सही स्टेप पर नंबर दें, सिर्फ अंतिम उत्तर के आधार पर मूल्यांकन पर न करें। इसे ही स्टेप मार्किंग कहते हैं, जिसे आमतौर पर सीबीएसई और कई दूसरे बोर्ड इस्तेमाल करते हैं। यह मूल्यांकन का एक तरीका है, जिसमें किसी सवाल को हल करने में इस्तेमाल किए गए हर सही स्टेप, फॉर्मूला या मेथड के लिए आंशिक अंक दिया जाता है। मूल्यांकन का यह तरीका सवाल हल करने के तरीके पर फोकस करता है, इससे परीक्षा का तनाव कम होता है और फाइनल अंसर गलत होने के बावजूद निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करता है।

बता दें, यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 12 मार्च को खत्म होने वाली हैं और 18 मार्च से मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू होगी। बोर्ड ने मूल्यांकन के लिए पूरे राज्य में कुल 249 मूल्यांकन केंद्र बनाए हैं। हाईस्कूल की परीक्षाओं के लिए, 70 अंकों के लिखित पेपर के 20 अंक ऑब्जेक्टिव-टाइप ओएमआर शीट से लिए जा रहे हैं, जबकि बाकी 50 अंकों का मूल्यांकन लिखित आंसर शीट से किया जाएगा। बोर्ड अधिकारियों ने कहा कि गाइडलाइंस का मकसद पूरे राज्य में छात्रों के प्रदर्शन के मूल्यांकन में निष्पक्षता, पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करना है।

बोर्ड की ओर से 7 मार्च को जारी निर्देश के अनुसार, परीक्षकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि हाईस्कूल की आंसर शीट में दिए गए अंक किसी भी हालत में तय अधिकतम 50 से ज्यादा न हों। इस बात का भी खास ध्यान रखा जाना चाहिए कि कोई भी सवाल बिना मूल्यांकन के न रहे और जवाबों का मूल्यांकन गलत न हो। इन निर्देशों में कहा गया है कि हर मूल्यांकन केंद्र पर, कॉपियों का मूल्यांकन सीसीटीवी की निगरानी में किया जाएगा। इसके लाइव फीड्स वेबकास्टिंग के जरिए राज्य और जिला स्तर के कंट्रोल रूम में भेजे जाएंगे। मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी भी तरह से गोपनीयता भंग होने पर संबंधित विभागों के नियमों और उत्तर प्रदेश पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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