Delhi Assembly Election Results 2025: लोकसभा चुनाव 2024 में शानदार प्रदर्शन की बदौलत विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (I.N.D.I.A) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली NDA के सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरा था। लेकिन उसके घटक दलों की आपसी कलह तथा भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पहले महाराष्ट्र और हरियाणा और अब दिल्ली के विधानसभा चुनाव में जीत ने इस विपक्षी गठबंधन की चमक को फीका कर दिया है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए इंडिया गठबंधन में कई ऐसे दल साथ आए थे, जो राज्यों में एक दूसरे के विरोधी हैं।
विपक्षी दल भले ही बीजेपी को केंद्र की सत्ता में आने से रोकने में कामयाब नहीं हुए। लेकिन एक दशक बाद भगवा पार्टी को अपने दम पर बहुमत हासिल करने से रोकना भी उनके लिए उपलब्धि थी। 'इंडिया' गठबंधन के बनते समय इसके घटक दलों ने बार-बार इस बात पर जोर दिया था कि अलायंस राष्ट्रीय चुनाव के लिए है और बाद में यह राज्य के आधार पर होगा। हालांकि, इस गठबंधन ने यह कल्पना नहीं की थी कि राज्यों में उनकी राजनीतिक लड़ाई इस हद तक जा सकती है कि गठबंधन में दरारें पड़ जाएं।
इस गठबंधन के घटक दलों के आपसी टकराव की सबसे जीवंत मिसाल दिल्ली का विधानसभा चुनाव है। राजधानी में कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के खिलाफ आक्रामक चुनाव अभियान चलाया था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने शराब घोटाले के सूत्रधार और शीश महल जैसे कटाक्ष के साथ आप और उसके संयोजक अरविंद केजरीवाल पर हमले किए।
समाजवादी पार्टी (SP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) जैसी 'इंडिया' गठबंधन की पार्टियों ने दिल्ली में इस आधार पर AAP का समर्थन किया था कि BJP का मुकाबला करने के लिए केजरीवाल की पार्टी की मजबूत स्थिति में है। अब कुछ महीने बाद बिहार में विधानसभा चुनाव होना है, जहां यह गठबंधन फिलहाल बरकरार नजर आ रहा है। लेकिन आने वाले सालों में पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के चुनावों में इस गठबंधन का अहम परीक्षा होगा।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी गठबंधन के घटक दलों पर तीखी टिप्पणी की। अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक मीम के साथ पोस्ट किया, "और लड़ो आपस में।"
जेब में एक बॉल पैन, गले में मफलर, बैगी स्वेटर और नीली वैगन आर कार के साथ AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने जब राजनीति में कदम रखा तो वह एक आदर्श आम आदमी थे। जब उन्होंने अपनी पार्टी का नाम आम आदमी के नाम पर रखने के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया तो लोग उनकी ओर आकर्षित हुए।
वह 2013 का वर्ष था। अब लगभग 12 साल बाद, उस पूर्व नौकरशाह और सामाजिक कार्यकर्ता का अखिल भारतीय स्तर की पार्टी और राष्ट्रीय स्तर का नेता बनने का सपना टूटने लगा है। लगातार 10 सालों तक दिल्ली पर शासन करने के साथ ही पंजाब में भी सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी शनिवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार गई। 70 में से उसे 22 सीटें मिलीं जबकि बीजेपी को 48 सीटें मिलीं।