West Bengal Election: कोलकाता की 11 सीटों में ऐसा क्या है कि इसपर जीत-हार में सिर मुंडवाने तक की शर्त लग रही!
West Bengal Chunav: राज्यसभा में TMC के संसदीय दल के नेता ब्रायन ने खुली चुनौती देते हुए ऐलान किया- अगर कोलकाता की 11 विधानसभा सीटों में से BJP एक भी सीट जीत जाती है, तो उनकी पार्टी का एक सांसद अपना सिर मुंडवा लेगा! हालांकि, उन्होंने किसी सांसद का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका यह बयान साफ तौर पर बीजेपी को सीधी टक्कर देने वाला है
West Bengal Election: कोलकाता की 11 सीटों में ऐसा क्या है कि इसपर जीत-हार में सिर मुंडवाने तक की शर्त लग रही!
हर चुनाव की तरह इस बार भी पश्चिम बंगाल की सियासत में गर्मी अपने चरम पर है। जुबानी जंग तेज है, बयानबाजी तीखी है और सत्ता की लड़ाई अब खुली चुनौती में बदल चुकी है। एक तरफ सत्तारूढ़ TMC, तो दूसरी ओर चुनौती देती BJP- दोनों के बीच वार-पलटवार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। इसी सियासी रणभूमि में TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कुछ ऐसा दावा कर दिया था, जिसने पूरे राजनीतिक माहौल में सनसनी फैला दी।
दरअसल राज्यसभा में TMC के संसदीय दल के नेता ब्रायन ने खुली चुनौती देते हुए ऐलान किया- अगर कोलकाता की 11 विधानसभा सीटों में से BJP एक भी सीट जीत जाती है, तो उनकी पार्टी का एक सांसद अपना सिर मुंडवा लेगा! हालांकि, उन्होंने किसी सांसद का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका यह बयान साफ तौर पर बीजेपी को सीधी टक्कर देने वाला है।
ऐसे में हर किसी के मन में कौतूहल है कि आखिर कोलकाता की इन 11 विधानसभा सीटों में ऐसा क्या है, जो इस चुनाव में सिर मुंडवा देने तक के दावे किए जा रहे हैं।
कोलकाता की 11 सीटें: सत्ता की सबसे बड़ी जंग का मैदान
बंगाल की राजधानी कोलकाता की 11 विधानसभा सीटें इस बार सिर्फ सीटें नहीं, बल्कि पूरे राज्य की सत्ता का भाग्य लिखने वाली कुंजी बन चुकी हैं। इतिहास की गूंज और वर्तमान की टक्कर के बीच “सिटी ऑफ जॉय” अब एक सियासी रणक्षेत्र में बदल गया है।
यह वही शहर है, जहां फुटबॉल और क्रिकेट की धड़कन बसती है और जहां 11 की संख्या सिर्फ खेल तक सीमित नहीं। जैसे मैदान पर 11 खिलाड़ी जीत-हार तय करते हैं, वैसे ही कोलकाता की ये 11 सीटें तय करेंगी कि नबन्ना की कुर्सी पर किसका राज होगा।
फिलहाल इन सभी सीटों पर तृणमूल का कब्जा है, लेकिन इस बार हवा कुछ बदली-बदली सी महसूस हो रही है। शहर की गलियों में अब कमल का रंग भी गहराने लगा है। मुकाबला सीधा है- तृणमूल की “दो पत्तियां” बनाम भाजपा का “कमल”।
विशेषज्ञों की मानें, तो लोगों के बीच चर्चा है कि इस बार कुछ सीटों पर कमल खिल सकता है। वहीं कांग्रेस और वामपंथ के लिए यहां जमीन लगभग खत्म सी नजर आती है।
अगर बंगाल में बदलाव की कोई बड़ी लहर उठती है, तो उसकी शुरुआत यहीं कोलकाता से होगी। लेकिन अगर ममता बनर्जी इस बदलती हवा को थामने में कामयाब रहीं, तो भाजपा के लिए सत्ता का रास्ता फिर मुश्किल हो जाएगा।
कौनसी हैं कोलकाता की वो 11 सीटें?
कोलकाता साउथ और कोलकाता नॉर्थ इन दोनों मिलाकर ही कोलकाता के अंदर 11 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं:
कोलकाता साउथ
बालीगंज
भवानीपुर
कोलकाता पोर्ट
रासबिहारी
कोलकाता नॉर्थ
बेलियाघाटा या बेलेघाटा
चौरंगी
एंटली
जोरासांको
काशीपुर-बेलगछिया
मानिकतला
श्यामपुकुर
पिछले चुनाव में सभी 11 सीटों पर किसका रहा दबदबा?
बालीगंज विधानसभा: इस सीट पर 2011 से लगातार तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है। यह सीट TMC के दिवंगत नेता सुब्रत मुखर्जी का गढ़ रही है। 2011 में उन्होंने 41,185 वोट, 2016 में 15,225, 2021 में 75,359 के भारी अंतर से इस सीट पर अपना दबदबा कायम रखा।
हालांकि, 4 नवंबर 2021 को मुखर्जी का निधन हो गया और उसके बाद 2022 के उपचुनाव में भी इस सीट को TMC के बाबुल सिप्रियो ने 20,228 वोटों के अंतर से जीता।
भवानीपुर विधानसभा: 2011 के उपचुनाव से लेकर 2021 के उपचुनाव तक लगाता ये सीट ममता बनर्जी के पास रही। 2021 के उपचुनाव में इस सीट को ममता बनर्जी ने 54,213 वोटों के अंतर से जीता। 2016 विधानसभा चुनाव में ये अंतर घटकर 25,301 हो गया।
2021 में इस सीट से TMC के सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने चुनाव लड़ा और 28,719 वोटों की अंतर से जीत हासिल की। हालांकि, उसी चुनाव में ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट से हार गईं, जिसके बाद सोवनदेब ने यहां से इस्तीफा दिया और फिर से ममता बनर्जी अपने पुराने गढ़ से उपचुनाव लड़ीं। बड़ी बात ये है कि इस बार वोट का अंतर पिछले सभी चुनावों से कहीं ज्यादा रहा। ममता 58,835 वोटों के अंतर से विजयी हुईं।
कोलकाता पोर्ट विधानसभा: इस सीट पर भी 2011 से TMC का कब्जा है। यहां से पश्चिम बंगाल अर्बन डेवलपमेंट मंत्री फिरहाद हकीम लगातार 15 सालों से लगातार जीतते आ रहे हैं। लगातार उनकी जीत का अंतर बढ़ा है। 2011 में 25,033, 2016 में 26,548 और 2021 में 68,554 वोटों के अंतर से उन्होंने अपनी जीत की हैट्रिक लगाई।
रासबिहारी विधानसभा: रासबिहारी सीट भी 2011 से लगातार ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल ही जीतती आ रही है। 2011 में यहां हार-जीत का अंतर 49,894 रहा। 2016 में घटकर 14,553 हो गया। हालांकि, 2021 विधानसभा चुनाव में वोटों के अंतर में उछाल आया और ये 21,414 हो गया।
बेलियाघाटा या बेलेघाटा विधानसभा: 2011 से TMC के परेश पॉल लगातार इस सीट से जीतते आ रहे हैं। उनका भी ग्राफ 2016 के चुनाव में थोड़ा गिरा, लेकिन 2021 विधानसभा चुनावों में हार जीत का अंतर जबरदस्त तरीक से बढ़ गया। 2011 में ये अंतर 31,688 वोटों का था, 2016 में घटकर 26,179 हुआ और पिछले चुनावों में 67,140 वोटों के अंतर से TMC ने इस सीट को जीत लिया।
बाकी सीटों पर TMC लगातार बड़े अंतर से जीतती आ रही है। शायद कॉन्फिडेंस है कि डेरेक ओ ब्रायन ने सांसद के सिर मुंडवाने का दावा किया है। आंकड़े बताते हैं कि जो भी दल कोलकाता की ये 11 विधानसभा सीटें जीतती है, राज्य में उसी की सरकार बनती है।