West Bengal Elections 2026: पहले चरण में 152 सीटों पर वोटिंग, नंदीग्राम से आसनसोल तक हाई-प्रोफाइल मुकाबले

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होगा। वहीं विधानसभा चुनाव के पहले चरण की प्रमुख सीटों में सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, कूच बिहार, रायगंज, बालुरघाट, मालदा, मुर्शिदाबाद, आसनसोल, बांकुरा और बहरामपुर शामिल हैं। इन सीटों पर होने वाले मुकाबले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं और यहां खड़े उम्मीदवार इस चरण में खास चर्चा का विषय बने हुए हैं

अपडेटेड Apr 19, 2026 पर 2:59 PM
Story continues below Advertisement
हले चरण में राज्य के उत्तरी, पश्चिमी और कुछ दक्षिणी इलाकों की कुल 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी।

पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले चरण की तैयारियां तेज हो गई हैं। यह चुनाव भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) दोनों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि दोनों ही पार्टियां सरकार बनाने और मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा रही हैं। पहले चरण में राज्य के उत्तरी, पश्चिमी और कुछ दक्षिणी इलाकों की कुल 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी। इसे चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है, क्योंकि इससे 4 मई को आने वाले नतीजों की दिशा काफी हद तक तय हो सकती है।

इस चरण की प्रमुख सीटों में सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, कूच बिहार, रायगंज, बालुरघाट, मालदा, मुर्शिदाबाद, आसनसोल, बांकुरा और बहरामपुर शामिल हैं। इन सीटों पर होने वाले मुकाबले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, और यहां खड़े उम्मीदवार इस चरण में खास चर्चा का विषय बने हुए हैं।

सुवेंदु अधिकारी


सुवेंदु अधिकारी, ममता बनर्जी के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं। उन्होंने साल 2020 में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़ दी थी और 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए थे। हालांकि उस चुनाव में टीएमसी ने 213 सीटें जीतकर बड़ी जीत हासिल की थी, लेकिन नंदीग्राम सीट पर अधिकारी ने कड़े मुकाबले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हरा दिया था। इस समय वह पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। आगामी चुनाव में उनका मुकाबला नंदीग्राम में पवित्र कर से और भवानीपुर में ममता बनर्जी से होगा।

दिलीप घोष (खड़गपुर सदर)

दिलीप घोष बीजेपी के पश्चिम बंगाल के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं और 2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य में पार्टी को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही है। उन्होंने 2016 में खड़गपुर सदर सीट जीती थी। इसके बाद 2021 के चुनाव में बीजेपी के हिरण चटर्जी ने टीएमसी के प्रदीप सरकार को कड़े मुकाबले में हराया था। दिलीप घोष मेदिनीपुर सीट से बीजेपी के सांसद भी रह चुके हैं।

अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर)

अधीर रंजन चौधरी कांग्रेस के अनुभवी नेता हैं और बहरामपुर सीट से पांच बार सांसद रह चुके हैं। यह उनके राजनीतिक करियर की बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें तृणमूल कांग्रेस के नेता और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान ने हरा दिया था। अब वह बहरामपुर से विधायक का चुनाव लड़ रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी के सुब्रत मैत्रा के खिलाफ मैदान में उतरकर अपनी मजबूत पकड़ वाली सीट को फिर से जीतने की कोशिश कर रहे हैं।

पवित्र कर (नंदीग्राम)

पवित्र कर पहले भारतीय जनता पार्टी के पुराने और भरोसेमंद नेता माने जाते थे और एक समय सुवेंदु अधिकारी के करीबी भी थे। लेकिन अपनी उम्मीदवारी घोषित होने से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। अब वे नंदीग्राम में अपने ही पुराने नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ने जा रहे हैं। नंदीग्राम-दो ब्लॉक के पूर्व पंचायत प्रधान के रूप में उनके पास अच्छा अनुभव है, और वे इसी के दम पर बीजेपी के प्रभाव को चुनौती देने की कोशिश करेंगे।

अग्निमित्रा पॉल (आसनसोल दक्षिण)

अग्निमित्रा पॉल पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जानी-मानी महिला नेताओं में गिनी जाती हैं और तृणमूल कांग्रेस की खुलकर आलोचना करने के लिए भी पहचानी जाती हैं। वह साल 2019 में बीजेपी में शामिल हुई थीं और तब से पार्टी में कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने टीएमसी की सायनी घोष को हराया था। अब 2026 के चुनाव में उनका मुकाबला तापस बनर्जी से होने वाला है।

प्रसून बनर्जी (चांचल)

प्रसून बनर्जी भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान रह चुके हैं और अब राजनीति में सक्रिय हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि खेल जगत में उनकी पहचान और लंबे समय से लोगों के बीच उनकी मौजूदगी का फायदा पार्टी को मिलेगा। खासकर मालदा क्षेत्र में उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

तापस बनर्जी (आसनसोल दक्षिण)

तापस बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के अनुभवी नेता हैं। उन्होंने साल 2011 से 2021 तक आसनसोल दक्षिण विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया था, लेकिन 2021 के चुनाव में उन्हें अग्निमित्रा पॉल से हार का सामना करना पड़ा। फिलहाल वे रानीगंज से विधायक हैं। अब माना जा रहा है कि आसनसोल दक्षिण में वे एक बार फिर मजबूत वापसी की कोशिश करेंगे और पार्टी की खोई हुई पकड़ वापस पाने के लिए कड़ा मुकाबला करेंगे।

रेखा पात्रा (हिंगलगंज)

रेखा पात्रा को संदेशखाली में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद काफी पहचान मिली। इन प्रदर्शनों के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने महिलाओं पर कथित अत्याचार के मुद्दे को उठाते हुए तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा था। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें बसीरहाट सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वहां उन्हें टीएमसी के हाजी नूरुल इस्लाम से हार मिली। अब पार्टी ने उन्हें हिंगलगंज विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है, जो महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर पार्टी के फोकस को दिखाता है।

हुमायूं कबीर (डोमकल)

हुमायूँ कबीर का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस से की, फिर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए। इसके बाद वे भारतीय जनता पार्टी में गए, फिर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और आखिर में फिर से तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। वे ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। साल 2025 में बाबरी मस्जिद के निर्माण का प्रस्ताव रखने के कारण उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ बनाई और अब वह अपने दम पर चुनाव लड़ने का फैसला कर चुके हैं।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।