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Anurag Kashyap: बॉलीवुड को लेकर अनुराग कश्यप के फिर बागी हुए सुर, बोले- वे फिल्मों की तारीफ तभी करते हैं जब वह सक्सेस होती....

Anurag Kashyap: अनुराग कश्यप से जब यह पूछा गया कि वह हमेशा अन्य अभिनेताओं और निर्देशकों के काम की तारीफ करते हैं, तो उनकी फिल्मों की कोई प्रशंसा क्यों नहीं करता? इस सवाल का उन्होंने हैरान कर देने वाला जवाब दिया।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Apr 11, 2026 पर 2:38 PM
Anurag Kashyap: बॉलीवुड को लेकर अनुराग कश्यप के फिर बागी हुए सुर, बोले- वे फिल्मों की तारीफ तभी करते हैं जब वह सक्सेस होती....
फिल्म के प्रमोशन के दौरान, अनुराग ने कहा कि वह दूसरे के काम कि तारीफ करने में हिचकिचाते नहीं है। लेकिन वहां पर लोग सफलता से ही आपको जज करते हैं।

Anurag Kashyap: फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप अन्य एक्टर्स और फिल्म निर्माताओं के काम की दिल खोलकर प्रशंसा करते रहे हैं। पिछले कई सालों से उन्होंने सोशल मीडिया पर एनिमल और धुरंधर से लेकर सूबेदार तक कई फिल्मों की तारीफ की है। हालांकि, हाल ही में एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि उन्हें बदले में ऐसी प्रशंसा क्यों नहीं मिलती, तो फिल्म निर्माता ने स्वीकार किया कि फिल्म इंडस्ट्री सिर्फ सफल फिल्मों की ही तारीफ करना पसंद करती है।

अनुराग फिलहाल तेलुगु-हिंदी एक्शन फिल्म 'डकैत' में आदिवी शेष और मृणाल ठाकुर के साथ नज़र आ रहे हैं। फिल्म के प्रमोशन के दौरान, अनुराग ने ज़ूम से बातचीत की, जहां उनसे पूछा गया कि क्या फिल्म इंडस्ट्री में लोग एक-दूसरे की तारीफ करने में हिचकिचाते हैं। अनुराग ने कहा, “बहुत से लोग मुझसे कहते हैं कि आप इतनी फिल्मों की तारीफ करते हैं, लेकिन कोई आपकी फिल्म की तारीफ नहीं करता। बात ये है कि मुझे फिल्में बहुत पसंद हैं। इसलिए, जब मुझे कोई फिल्म पसंद आती है, तो मैं कह देता हूं। कोई नहीं बोलता मैं क्या करूं? बंदूक की नोक पर तो कोई मजबूर नहीं कर सकता।”

इस पर उनकी को-स्टार मृणाल ने कहा कि इंडस्ट्री में बहुत कम लोग हैं, जो दिल से दूसरों की तारीफ करते हैं। अनुराग ने बीच में टोकते हुए कहा, “इंडस्ट्री का अभी यही हाल है, जब कोई फिल्म सफल हो जाती है, तो सब उसकी तारीफ करते हैं।”

पिछले महीने अनुराग ने इंस्टाग्राम पर अनिल कपूर अभिनीत फिल्म 'सुबेदार' की एक लंबी पोस्ट लिखकर प्रशंसा की। उन्होंने फिल्म का रिव्यू करते हुए लिखा, “प्राइम वीडियो पर आ रही 'सुबेदार' को सिनेमाघरों में रिलीज होना चाहिए था। इसे सिनेमाघरों में देखना बहुत अच्छा लगता; यह स्पष्ट रूप से बड़े पर्दे के लिए एनामोर्फिक तकनीक से शूट की गई है, बड़े पर्दे के लिए ही बनाई गई है। सुरेश त्रिवेणी बुंदेलखंड-चंबल की दुनिया का निर्माण शानदार करते हैं, जिसमें पितृसत्ता और विशेषाधिकार का भाव साफ दिखता है। जहां महिलाएं पुरुषों के बराबर पितृसत्तात्मक हैं और जो नहीं हैं, वे भी पुरुषों की तरह संघर्ष करती हैं। ये पुरुष प्रधान बीहड़ इलाके हैं, जहां कभी फूलन देवी का जन्म हुआ था।

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