Get App

Holi Special: इस फिल्म से शुरू हुआ था बॉलीवुड में होली का ट्रेंड, आजादी के पहल शूट हुआ ये एवरग्रीन होली सॉन्ग

Holi Special: होली का त्योहार भारतीय सिनेमा में हमेशा से खास रहा है। रंगों, संगीत और नृत्य से भरे इस पर्व को बॉलीवुड ने कई यादगार गीतों के जरिए अमर कर दिया है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि बॉलीवुड का पहला होली गीत आज़ादी से पहले ही फिल्माया गया था। यह गीत था ‘आज होली खेलेंगे साजन के संग’, जो 1940 में रिलीज़ हुई मेहबूब खान की फिल्म 'औरत' का हिस्सा था।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Mar 03, 2026 पर 3:41 PM
Holi Special: इस फिल्म से शुरू हुआ था बॉलीवुड में होली का ट्रेंड, आजादी के पहल शूट हुआ ये एवरग्रीन होली सॉन्ग

रंगों के त्योहार होली पर बॉलीवुड के गाने घर-घर बजते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिंदी सिनेमा का पहला होली गीत भारत की आजादी से 7 साल पहले रिलीज हो चुका था? 1940 में आई महबूब खान की फिल्म 'औरत' ने 'आज होली खेलेंगे साजन के संग' गाकर रंगों की मस्ती को सिल्वर स्क्रीन पर उतारा। यह ब्लैक-व्हाइट दौर का वह गाना था, जिसने भारतीय सिनेमा में त्योहारों को संगीतमय बनाने की नींव रखी। आज जब हम 'रंग बरसे' या 'होली के दिन दिल मिल जाते हैं' गाते हैं, तो यह पुराना गीत हमें सिनेमाई इतिहास की गहराई दिखाता है।

फिल्म 'औरत' एक ग्रामीण मां की भावुक कहानी थी, जो गरीबी, बलिदान और परिवारिक बंधनों को बयां करती है। सरदार अख्तर ने राधा का किरदार निभाया, तो सुरेंद्र, याकूब, कन्हैयालाल और अरुण कुमार आहूजा जैसे कलाकारों ने जान फूंकी। गाने का फिल्मांकन जमुना नदी के किनारे किया गया, जहां गांववासी रंगों से सराबोर होकर नाचते-गाते दिखे। अनिल बिस्वास ने इसे न सिर्फ संगीत दिया, बल्कि अपनी मधुर आवाज भी उधार दी। सफदर आह के बोलों में होली की चुलबुली भंगिमा थी - "आज होली खेलेंगे साजन के संग, रंग डालेंगे संग साजन के संग।" फिल्म में एक और होली गीत 'जमुना तट पर होली खेलेंगे श्याम' भी था, जो अनिल बिस्वास का ही कमाल था। यह ट्रैक इतना लोकप्रिय हुआ कि रेडियो पर बजता रहा।

महबूब खान की दूरदर्शिता ने 'औरत' को क्लासिक बना दिया। 1957 में इन्होंने इसे ही रीमेक कर 'मदर इंडिया' बनाई, जिसमें नरगिस का अमर किरदार था। सुनील दत्त, राजेंद्र कुमार और राज कुमार के साथ यह फिल्म ऑस्कर तक पहुंची। लेकिन होली गीत का जादू 'औरत' से ही शुरू हुआ। उस दौर में सिनेमा सामाजिक संदेश देता था, और होली जैसे त्योहारों ने इसे रंगीन बना दिया। काले-सफेद फिल्म में रंगों की कल्पना इतनी जीवंत थी कि दर्शक खुद को रोक न सके।

आज होली 2026 में जब रणबीर कपूर राहा संग रंग खेल रहे हैं या शाहरुख-अक्षय होली पार्टी कर रहे, तो यह पुराना गीत हमें जड़ों से जोड़ता है। बॉलीवुड ने तब से होली को 'नवरंग' (1959) के 'अरे जा रे हट नटखट', 'कटी पतंग' (1971) के 'आज ना छोड़ेंगे', 'शोले' (1975) के 'होली के दिन दिल मिल जाते हैं' और 'सिलसिला' (1981) के 'रंग बरसे' तक सजाया। ये गाने न सिर्फ मनोरंजन देते, बल्कि एकता, प्यार और भुलावे का संदेश भी। महबूब खान का यह योगदान साबित करता है कि सिनेमा त्योहारों का आईना है। यूट्यूब पर आज भी यह गीत सुना जा सकता है, जो समय की कसौटी पर खरा उतरता है। होली की मस्ती में इस पुरानी धुन को बजाएं, और महसूस करें सिनेमाई सफर की शुरुआत।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें