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Suhana Khan: सुहाना खान ने 'इक्कीस' के गाने 'सितारे' का रिव्यू, रूमर्ड बॉयफ्रेंड अगस्त्य नंदा के लिए कही ये बात

Suhana Khan: फिल्म में सिमर भाटिया, जयदीप अहलावत और दिवंगत सुपरस्टार धर्मेंद्र नजर आने वाले हैं। अगस्त्य नंदा स्टारर इस फिल्म के गाने सितारे को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Dec 04, 2025 पर 8:00 PM
Suhana Khan: सुहाना खान ने 'इक्कीस' के गाने 'सितारे' का रिव्यू, रूमर्ड बॉयफ्रेंड अगस्त्य नंदा के लिए कही ये बात
सुहाना खान ने 'इक्कीस' के गाने 'सितारे' का रिव्यू

Suhana Khan: अगस्त्य नंदा और सिमर भाटिया की फिल्म 'इक्कीस' रिलीज़ के लिए तैयार है। ये मूवी कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे की 'तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी' से क्लैश करेगी। हाल ही में, 'इक्कीस' के निर्माताओं ने अपना पहला गाना 'सितारे' रिलीज़ किया है, जो वायरल भी हो गया है। सुहाना खान और नव्या नंदा ने भी इस पर रिएक्ट किया है।

सुहाना खान ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर बिना किसी कैप्शन के सितारे गाने को शेयर किया। इससे पहले अक्षय कुमार ने अपनी भतीजी सिमर भाटिया के लिए एक नोट भी लिखा था, "एक नन्ही सी बच्ची के रूप में तुम्हें गोद में लेने से लेकर अब तुम्हें फिल्मों की दुनिया में कदम रखते देखने तक... जिंदगी वाकई पूरी हो गई है। सिमर, मैंने तुम्हें एक शर्मीली बच्ची से, जो अपनी मां के पीछे छिप जाती थी, एक आत्मविश्वास से भरी वुमन में बदलते देखा है, जो कैमरे का सामना करने के लिए ऐसे तैयार है, जैसे वह इसके लिए पैदा ही हुई हो। सफर मुश्किल है, लेकिन तुम्हें जानकर, तुम उसी चमक, उसी ईमानदारी और उसी जिद्दी दृढ़ संकल्प के साथ इसमें एंटर करोगी जो हमारे परिवार में है। हम भाटिया का फंडा सिंपल है- काम करो, दिल से करो, और फिर यूनिवर्स का जादू देखो। मुझे तुम पर बहुत गर्व है बेटा... दुनिया सिमर भाटिया से मिलने वाली है... लेकिन मेरे लिए तुम हमेशा एक स्टार रही हो। चमकते रहो! जय महादेव।

जहां यह फ़िल्म वीरता, बलिदान और देशभक्ति पर केंद्रित है, वहीं "सितारे" यंग लव स्टोरीज की दुनिया की एक प्यारी झलक दिखाती है। व्हाइट नॉइज़ कलेक्टिव्स ने इस गाने की रचना और निर्माण किया है, जिसे अरिजीत सिंह ने गाया है और इसके बोल अमिताभ भट्टाचार्य के हैं।

श्रीराम राघवन द्वारा निर्देशित और मैडॉक फिल्म्स के तहत दूरदर्शी दिनेश विजान द्वारा निर्मित, इक्कीस भारत के सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र पुरस्कार विजेता, सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेतपाल की असाधारण सच्ची कहानी बताती है, जिनका 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान अद्वितीय साहस एक राष्ट्रीय प्रतीक बन गया है।

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