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Chabahar Port: बजट में चाबहार पोर्ट के लिए नहीं हुई कोई ऐलान, अमेरिका-ईरान तनाव के बाद भारत ने बदली रणनीति!

Chabahar Port : भारत और ईरान मिलकर चाबहार पोर्ट को इंटरनेशनल नॉर्थ–साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से जोड़ने के लिए काफी लंबे समय से काम कर रहे हैं। INSTC एक करीब 7,200 किलोमीटर लंबा मल्टी-मोड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क है, जो भारत को ईरान, अफगानिस्तान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ता है और इन क्षेत्रों के बीच सामान की आवाजाही को आसान बनाता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 01, 2026 पर 6:31 PM
Chabahar Port: बजट में चाबहार पोर्ट के लिए नहीं हुई कोई ऐलान, अमेरिका-ईरान तनाव के बाद भारत ने बदली रणनीति!
Chabahar port in Iran: बजट में चाबहार पोर्ट को कोई धनराशि आवंटित नहीं की गई।

देश का आम बजट आज यानी एक फरवरी को लोकसभा में पेश किया गया है। वहीं इस बार के बजट में पहली बार चाबहार पोर्ट परियोजना के लिए कोई राशि नहीं रखी गई है। माना जा रहा है कि ईरान पर अमेरिका के नए प्रतिबंधों को देखते हुए भारत ने यह कदम सावधानी के तौर पर उठाया है। बता दें कि भारत के लिए ईरान का चाबहार बंदरगाह एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। चाबहार पोर्ट, भारत की मध्य एशिया तक पहुंचने की उस ‘लाइफलाइन’ का सवाल है, जिसे लंबे समय की मेहनत के बाद तैयार किया गया है।

हर साल होता था बजट का प्रावधान  

भारत और ईरान मिलकर चाबहार पोर्ट को इंटरनेशनल नॉर्थ–साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से जोड़ने के लिए काफी लंबे समय से काम कर रहे हैं। INSTC एक करीब 7,200 किलोमीटर लंबा मल्टी-मोड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क है, जो भारत को ईरान, अफगानिस्तान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ता है और इन क्षेत्रों के बीच सामान की आवाजाही को आसान बनाता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ईरान के दक्षिणी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में चल रहे बड़े कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के लिए हर साल करीब 100 करोड़ रुपये का प्रावधान करता रहा है, जहां वह एक महत्वपूर्ण विकास साझेदार रहा है।

2024-25 में 400 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई थी। वहीं 2025-26 में भी संशोधिन अनुमान में इतनी ही राशि आवंटित की गई। मगर इस वर्ष भारत ने कोई आवंटन नहीं किया है। हाल ही में अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इसके बाद ही भारत सरकार ने यह कदम उठाया है।

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