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Dharali Ground report: 'धराली के मलबे में आज भी शायद दबी हो भाई की लाश...रात की बारिश हमें अब भी दहलाती है'

Dharali Disaster Ground Report : जिस दिन आपदा आई, उस सुबह धराली में मौजूद सोमेश्वर देवता के मंदिर में मेला था। गांव के लोग तैयारियों में व्यस्त थे और आसपास के इलाकों से भीड़ जुटने वाली थी। दोपहर तक मंदिर के प्रांगण में करीब 50 से 60 लोग मौजूद थे। लेकिन लगभग डेढ़ बजे, खीरगंगा से बाढ़ का सैलाब सीधी रेखा में आया और उसके सामने जो भी घर, दुकान या होटल था, वह बह गया। मंदिर का भी एक हिस्सा टूट गया पर प्रांगण में मौजूद लोगों की जान बच गई और वो पहाड़ी की ओर भागे

Rajat Kumarअपडेटेड May 18, 2026 पर 8:58 PM
Dharali Ground report: 'धराली के मलबे में आज भी शायद दबी हो भाई की लाश...रात की बारिश हमें अब भी दहलाती है'
धराली : जहां कभी सेब के बगीचों में जीवन की मिठास घुली रहती थी, अब यहां की पहचान ये आपदा बन गई है।

'मेरा भाई तो अब तक लापता है, शायद उसकी लाश भी इसी मलबे के नीचे कहीं दबी हो। शुरुआत में काफी खोजने की कोशिश की पर अब सारी उम्मीद खो चुका हूं।'...'अब रात में जब भी बारिश होती है तो मुझे नींद ही नहीं आती, एक डर सा लगा रहता है'

ये सारी बातें कहते हुए धराली के शैलेंद्र पवार की आंखों में भाई को खोने का दर्द था तो महेश सिंह पवार की आंखों में उस आपदा का खौफ अभी भी बरकरार था। धराली में आए आपदा को 10 महीने से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है पर वहां के लोगों की जिंदगी उस हादसे के ही इर्द गिर्द घूम रही है। जहां कभी सेब के बगीचों में जीवन की मिठास घुली रहती थी, अब यहां की पहचान ये आपदा बन गई है। लोगों ने इस आपदा में अपने परिवार, घर और जानवर... सबकुछ को मलबे में तब्दील होते देखा। कभी गुलजार रहने वाला धराली का बाजार अब मलबे का ढेर है। कहीं ढही हुई दीवारों के बीच कपड़े और जूते बिखरे हैं, तो कहीं पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़ों के बीच घरों के बर्तन दबे हुए दिख जाते हैं। इन नजारों को देखकर ऐसा लगता है मानो ये सब अब भी उस खौफनाक मंजर की गवाही दे रहे हों।

हिमालय की ऊंची चोटियों में उतरकर धराली में आती खीर गंगा...यूं तो शांत और धीमे प्रवाह में बहती है, लेकिन 5 अगस्त 2025 को इसने अपना ऐसा रूप दिखाया, जिससे इस इलाके का पूरा नक्शा ही बदल गया। धराली में बीते पांच अगस्त को खीरगंगा से आई बाढ़ ने मिनटों में बाजार, होटल और घर बहा दिए। तबाही के साथ पीछे रह गए सिर्फ़ मलबे के ढेर, अपनों की तलाश में सदमे में डूबे वे लोग और कई सवाल?

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