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Gita Gopinath: 'टैरिफ से कहीं ज्यादा खतरनाक है प्रदूषण', दावोस में गीता गोपीनाथ ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बजाई खतरे की घंटी

Gita Gopinath: गीता गोपीनाथ के अनुसार, प्रदूषण केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके गहरे आर्थिक परिणाम है। खराब हवा के कारण लोगों की कार्यक्षमता घट रही है और बीमारियों की वजह से वर्किंग डेज का नुकसान हो रहा है

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Jan 22, 2026 पर 11:30 AM
Gita Gopinath: 'टैरिफ से कहीं ज्यादा खतरनाक है प्रदूषण', दावोस में गीता गोपीनाथ ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बजाई खतरे की घंटी
उन्होंने कहा कि अगर भारत को अपनी आर्थिक रफ्तार बरकरार रखनी है, तो प्रदूषण को 'युद्ध स्तर' पर खत्म करना होगा

Gita Gopinath: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री और हार्वर्ड प्रोफेसर गीता गोपीनाथ ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारत को एक कड़ा संदेश दिया है। उनका मानना है कि अमेरिकी टैरिफ या वैश्विक व्यापार युद्ध की तुलना में प्रदूषण भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ा और 'खामोश' खतरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर भारत को अपनी आर्थिक रफ्तार बरकरार रखनी है, तो प्रदूषण को 'युद्ध स्तर' पर खत्म करना होगा।

आर्थिक विकास का 'साइलेंट किलर' है प्रदूषण

गीता गोपीनाथ के अनुसार, प्रदूषण केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके गहरे आर्थिक परिणाम है। खराब हवा के कारण लोगों की कार्यक्षमता घट रही है और बीमारियों की वजह से वर्किंग डेज का नुकसान हो रहा है। वायु प्रदूषण से भारत में हर साल लगभग 17 लाख मौतें होती है जो कुल मौतों का 18% है। स्वास्थ्य पर होने वाला यह विशाल खर्च जीडीपी को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। गोपीनाथ ने चेतावनी दी कि कोई भी विदेशी निवेशक भारत में ऑपरेशंस शुरू करने से पहले वहां के वातावरण और रहने की स्थिति को देखता है। अगर हवा जहरीली रही, तो प्रतिभा और पैसा दोनों बाहर जा सकते हैं।

वर्तमान में अमेरिकी टैरिफ चर्चा का केंद्र बना हुआ है, लेकिन वे बाहरी और अस्थायी हो सकते हैं। जबकि प्रदूषण एक आंतरिक और स्थायी चुनौती है। गोपीनाथ के अनुसार, 'प्रदूषण का असर किसी भी टैरिफ से कहीं अधिक परिणामी और गंभीर है।'

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