India Russian Oil Import News: मार्च में रिकॉर्ड खरीदारी के बाद अप्रैल महीने में भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल के आयात में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म 'केपलर' (Kpler) के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों में छूट देने के बावजूद रूस से होने वाली लोडिंग में रुकावट और घरेलू रिफाइनरियों के मेंटेनेंस के कारण यह गिरावट आई है। हालांकि, इस कमी को पूरा करने के लिए भारत ने ईरान और वेनेजुएला जैसे पुराने सहयोगियों से तेल की खरीदारी फिर से शुरू कर दी है।
रूसी तेल के आयात में क्यों आई कमी?
अप्रैल में भारत का रूसी तेल आयात घटकर 1.56 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया, जो मार्च में 1.98 mbd के रिकॉर्ड स्तर पर था। इसके मुख्य कारण ये है:
लोडिंग में बाधा: यूक्रेन के हमले के बाद एक प्रमुख रूसी टर्मिनल पर लोडिंग में आई दिक्कतों ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया।
रिफाइनरी मेंटेनेंस: Nayara जैसी बड़ी रिफाइनरी में 35 दिनों का मेंटेनेंस शटडाउन होने के कारण इसकी रूसी तेल की मांग 3,15,000 बैरल प्रतिदिन से घटकर महज 25,000 bpd रह गई।
प्रमुख खरीदार: इंडियन ऑयल (IOC) अभी भी 6,77,000 बैरल प्रतिदिन के साथ रूस का सबसे बड़ा भारतीय खरीदार बना हुआ है।
ईरान और वेनेजुएला से 7 साल बाद फिर शुरू तेल खरीद
भारत ने अपनी तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए एक बार फिर अपने पुराने सहयोगियों की ओर रुख किया है। अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली 30 दिनों की छूट के बाद, भारत ने 7 साल के अंतराल के बाद ईरान से 1,37,000 बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया है। भारतीय रिफाइनरियों के लिए ईरानी तेल काफी अनुकूल माना जाता है। लगभग एक साल के अंतराल के बाद वेनेजुएला से भी 2,98,000 बैरल प्रतिदिन तेल की खेप भारत पहुंची है।
होर्मुज की नाकेबंदी के बीच तलाशे नए वैकल्पिक रास्ते
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बना हुआ है। होर्मुज से भारत का 40-50% तेल गुजरता था। अमेरिका ने फिलहाल यहां नाकेबंदी की हुई है और किसी भी जहाज के आने-जाने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। इस सब के बीच भारत ने अब सुरक्षित वैकल्पिक रास्तों का सहारा लिया है। भारत में तेल अब सऊदी अरब के यानबू और यूएई के फुजैरा पाइपलाइनों के जरिए आ रहा है, जो होर्मुज के रास्ते को बायपास करते हैं। इस बदलाव के कारण सऊदी अरब से आयात में 23% और यूएई से आयात में 191% की भारी वृद्धि हुई है।
युद्ध और वैश्विक तनाव को देखते हुए भारत ने अब केवल कुछ देशों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी तेल सप्लाई के स्रोतों को बढ़ाया है। वर्तमान में भारत रूस और पश्चिम एशिया के अलावा ब्राजील और नाइजीरिया जैसे देशों से भी तेल खरीद रहा है।