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महिला आरक्षण के लिए डीलिमिटेशन क्यों, लोकसभा की सीटें बढ़ाने की क्या जरूरत? इन सभी सवालों के जवाब मिलेंगे यहां

Parliament Special Session: सरकार ने इन चिंताओं को खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि दक्षिण के राज्यों को बिल्कुल भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। डीलिमिटेशन को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, आइए जानते हैं डीलिमिटेशन प्रक्रिया और महिला आरक्षण बिल एक दूसरे से क्यों जुड़े हैं। साथ ही और भी कई सवालों के जवाब

Curated By: Shubham Sharmaअपडेटेड Apr 16, 2026 पर 1:21 PM
महिला आरक्षण के लिए डीलिमिटेशन क्यों, लोकसभा की सीटें बढ़ाने की क्या जरूरत? इन सभी सवालों के जवाब मिलेंगे यहां
Parliament Special Session: महिला आरक्षण के लिए डेलिमिटेशन क्यों, लोकसभा की सीटें बढ़ाने की क्या जरूरत? इन सभी सवालों के जवाब मिलेंगे यहां

केंद्र सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश कर दिया। इसके लिए सरकार ने खासतौर से संसद का विशेष सत्र बुलाया। कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस बिल को पेश करते हुए बहस की शुरुआत की। उन्होंने संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026 पेश किया। साथ ही उन्होंने डीलिमिटेशन बिल, 2026 भी सदन में रखा। इन बिलों के जरिए विधानसभाओं और संसद में महिलाओं को एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया जा रहा है।

इसी दौरान, गृह मंत्री अमित शाह ने संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) बिल, 2026 भी सदन में पेश किया। इन तीनों बिलों को पेश किए जाने पर विपक्ष की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। कांग्रेस के सांसद केसी वेणुगोपाल ने सभी तीनों बिलों का विरोध किया और सदन में पार्टी की आपत्तियां दर्ज कराईं।

कांग्रेस सांसद ने कहा, "सरकार पूरी तरह से संविधान को हाईजैक करना चाहती है।" इस पर संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू और गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि अभी सिर्फ बिल पेश किए गए हैं। इन पर चर्चा अभी बाकी है।

इस बिल के पास होने से लोकसभा की कुल सीटें मौजूदा 543 से बढ़कर 850 हो जाएंगी। हर राज्य की सीटों की संख्या भी बढ़ जाएगी।

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