इस्लाम में बच्चों की परवरिश को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। कहा जाता है कि बच्चे परिवार और समाज का भविष्य होते हैं, इसलिए उनकी सही देखभाल जरूरी है। इस्लामी शिक्षाओं में हजरत अली से जुड़ी 7-7-7 पैरेंटिंग थ्योरी को काफी असरदार माना जाता है। इसमें बच्चे की पूरी परवरिश को तीन हिस्सों में बांटा गया है, हर हिस्सा 7 साल का होता है। पहले 7 साल में बच्चे को प्यार, खेल और देखभाल दी जाती है। अगले 7 साल में उसे अच्छे संस्कार, अनुशासन और सही-गलत की समझ सिखाई जाती है। और आखिरी 7 साल में माता-पिता उसे समझदारी से गाइड करते हैं, जैसे एक दोस्त और सलाहकार की तरह। ये तरीका बच्चों को अच्छा इंसान बनाने में मदद करता है।
