हर माता-पिता की सबसे बड़ी इच्छा होती है कि उनका बच्चा न सिर्फ पढ़ाई में अच्छा हो, बल्कि अच्छे संस्कारों और सही सोच के साथ आगे बढ़े। लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, उनका सामाजिक दायरा भी बढ़ने लगता है। वे नए दोस्तों से मिलते हैं, अलग-अलग माहौल में जाते हैं और कई तरह के अनुभवों से गुजरते हैं। इसी दौरान कई बार वे अनजाने में ऐसी संगत में भी पड़ सकते हैं, जो उनके व्यवहार और भविष्य दोनों पर असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था सबसे संवेदनशील समय होता है, जब बच्चे बहुत जल्दी दूसरों से प्रभावित हो जाते हैं और सही-गलत का फर्क समझने में गलती कर सकते हैं।
