आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में आम लोग भी अपनी सेहत को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सजग हो गए हैं। बढ़ती डायबिटीज, मोटापा और थकान की शिकायतों के बीच लोग अपने रोज के खाने पर सवाल करने लगे हैं। ऐसे माहौल में आकृति की कहानी कई लोगों को खुद से जोड़कर देखने पर मजबूर करती है। करीब दस साल पहले उन्होंने रोटी और चावल को अपनी थाली से हटा दिया, लेकिन ये फैसला किसी फैशन या सोशल मीडिया ट्रेंड से प्रेरित नहीं था। उनका मानना था कि लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए खानपान में बदलाव जरूरी है। आज जहां अधिकतर परिवार रोटी-चावल को भोजन का आधार मानते हैं, वहीं आकृति दाल से बने चीले, सब्जियां और संतुलित आहार को प्राथमिकता देती हैं।
