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फूंक मारते समय मुंह से निकलता धुआं, जानें क्यों ठंड में दिखाई देता है और गर्मियों में नहीं

बचपन में सर्दियों की सुबह हम मुंह से भाप निकालकर ‘सुपरहीरो’ या ‘ड्रैगन’ बनने का खेल खेलते थे। लेकिन क्या आपने सोचा है कि शरीर में कोई आग नहीं जलती फिर भी यह धुआं क्यों दिखता है? और गर्मियों में यह जादू क्यों गायब हो जाता है? आइए, इसके पीछे का विज्ञान आसान भाषा में समझते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 24, 2026 पर 4:03 PM
फूंक मारते समय मुंह से निकलता धुआं, जानें क्यों ठंड में दिखाई देता है और गर्मियों में नहीं

सर्दियों में अक्सर हम देखते हैं कि रजाई से बाहर निकलते ही हमारे मुंह से सफेद धुएं का गुबार निकलता है। बचपन में हम इसे दोस्तों के सामने शान दिखाने के लिए करते थे – बिना माचिस या सिगरेट के ‘फूंक’ मारना और धुएँ के छोटे-छोटे छल्ले बनाना। यह दृश्य जितना मजेदार लगता है, उतना ही विज्ञान से जुड़ा हुआ भी है। वास्तव में, यह धुआँ धुएँ जैसा नहीं होता, बल्कि हमारी गर्म सांस और शरीर में मौजूद नमी का ठंडी हवा के साथ टकराने पर बनने वाला दृश्य रूप है। जब हमारी गर्म और नम सांस ठंडी हवा से मिलती है, तो उसमें मौजूद अदृश्य नमी पानी की छोटी बूंदों में बदल जाती है।

यही प्रक्रिया हमें एक छोटे बादल के रूप में दिखाई देती है। गर्मियों में यह जादू क्यों गायब हो जाता है? इसका कारण तापमान का अंतर कम होना है, जिससे नमी गैस के रूप में हवा में मिल जाती है और दिखाई नहीं देती।

हमारा शरीर: चलता-फिरता हीटर

इसलिए हमें यह सामान्य परिस्थितियों में दिखाई नहीं देती।

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