MP Elections: मध्य प्रदेश की ये 10 सीट करेंगी दिग्गजों का भाग्य तय, सांसद-मंत्री से लेकर बागी नेता तक हैं उम्मीदवार
Madhya Pradesh Election 2023: मध्य प्रदेश में चुनावी बिगुल बज चुका है। राज्य की 230 विधानसभा सीटों पर आगामी 17 नवंबर को चुनाव होने हैं। इस चुनाव में कई दिग्गजों का राजनीतिक भविष्य भी दांव पर लगा हुआ है। यहां 10 ऐसी ही वीआईपी विधानसभा सीटों पर एक नजर डालते हैं, जहां से केंद्रीय मंत्री, सांसद से लेकर मुख्यमंत्री पद के दावेदार तक चुनावी मैदान में हैं
मध्य प्रदेश में BJP और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई है
Madhya Pradesh Election 2023: मध्य प्रदेश में चुनावी बिगुल बज चुका है। राज्य की 230 विधानसभा सीटों पर आगामी 17 नवंबर को चुनाव होने हैं। यहां एक-दो सीटों को छोड़कर बाकी जगह भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (Congress) के बीच सीधी लड़ाई है। बीजेपी ने राज्य की 136 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी पहली सूची आनी बाकी है। इस चुनाव में कई दिग्गजों का राजनीतिक भविष्य भी दांव पर लगा हुआ है। यहां 10 ऐसी ही वीआईपी विधानसभा सीटों पर एक नजर डालते हैं, जहां से केंद्रीय मंत्री, सांसद से लेकर मुख्यमंत्री पद के दावेदार तक चुनावी मैदान में हैं।
1. बुधनी विधानसभा
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस सीट से पिछले 4 बार से लगातार मुख्यमंत्री है। पिछले विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री सुभाष यादव के बेटे अरुण यादव ने उन्हें चुनौती दी थी, लेकिन वह करीब 58,000 वोटों के अंतर से हार गए थे। फिलहाल अभी कांग्रेस ने इस सीट पर अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है, लेकिन मुख्यमंत्री की सीट होने के नाते यह विधानसभा चुनाव की सबसे हॉट सीटों में से एक हो गई है।
2. छिंदवाड़ा विधानसभा
छिंदवाड़ा इलाके को मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का गढ़ माना जाता है। 2018 के विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद कांग्रेस ने कमलनाथ को मुख्यमंत्री घोषित किया था। इसके बाद वह 2018 में उपचुनाव में करीब 25,000 वोटों से इस सीट से जीतकर विधायक बने थे। बीजेपी ने पिछले 10 सालों में कई बड़े विपक्षी नेताओं को उनके गढ़ में मात दी है। ऐसे में पार्टी छिंदवाड़ा में भी अपने सबसे मुख्य प्रतिद्वंदी को हराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
3. दिमनी विधानसभा
मुरैना इलाके में इस विधानसभा सीट पर बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को चुनावी मैदान में उतारकर सभी को हैरान कर दिया है। 2018 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के गिर्राज दंडोतिया ने 10,000 से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी। हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिंया के बगावत के बाद दंडोतिया भी उनके साथ बीजेपी में चले गए, जिसके बाद 2020 में इस सीट पर उपचुनाव हुआ। हालांकि इस चुनाव में दंडोतिया को हार का सामना करना पड़ा और कांग्रेस के रवींद्र सिंह तोमर भिडोसा ने यहां से जीत हासिल की। बीजेपी ने इस बार दंडोतिया का टिकट काटकर अपने कद्दावार नेता नरेंद्र सिंह तोमर को करीब 15 सालों के बाद विधानसभा चुनाव में उतारा है। यह बताता है पार्टी इस सीट को जीतने के लिए कितनी तत्पर है।
बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को बड़े ओबीसी चेहरे के रूप में नरसिंहपुर विधानसभा चुनाव में उतारा है। नरसिंहपुर सीट पर प्रहलाद सिंह पटेल के परिवार का दबदबा रहा है, लेकिव वह खुद इस सीट से पहली बार लड़ रहे हैं। 2018 में इस सीट से उनके भाई जालम सिंह पटेल करीब 37,000 वोटों से जीतकर विधायक बने थे, लेकिन इस बार पार्टी ने उनकी जगह उनके भाई प्रहलाद सिंह पटेल को उम्मीदवार बनाया है।
5. निवास विधानसभा
इस विधानसभा सीट से केंद्रीय राज्य मंत्री और बीजेपी के बड़े आदिवासी चेहरे फग्गन सिंह कुलस्ते चुनावी मैदान में है। पार्टी ने कुलस्ते को करीब 33 सालों के बाद विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए भेजा है। वह फिलहाल मंडला से सांसद है। हालांकि बीजेपी ने इस बार निवास विधानसभा से उनके भाई रामप्यारे कुलस्ते की जगह चुनावी मैदान में उतारा है। रामप्यारे कुलस्ते ने 2008 और 2013 में दो बार यह सीट जीता था, लेकिन 2018 के पिछले चुनाव में वह कांग्रेस के मर्सोकले से 28,000 वोटों से हार गए थे। ऐसे में बीजेपी इस बार कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती है।
6. इंदौर-1
बीजेपी ने अपने दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय को इंदौर-1 से टिकट देकर एक बार फिर मध्य प्रदेश की सक्रिय राजनीति में भेजा है। विजयवर्गीय करीब 10 सालों बाद कोई चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले वह 6 बार विधायक रह चुके हैं और 1990 के बाद से हर विधानसभा चुनाव जीता है। बीजेपी ने कांग्रेस के मजबूत नेता संजय शुक्ला के खिलाफ उम्मीदवार बनाया है, जिन्होंने 2018 में 8,000 से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी।
7. लहार विधानसभा
इस सीट को मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता गोविंद सिंह का गढ़ माना जाता है। वह पिछले 7 बार से इस सीट से लगातार विधायक बन रहे हैं। 2018 में उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार को 9 हजार वोटों से हराकर जीत हासिल की थी। गोविंद सिंह को जहां कमलनाथ और दिग्विजय सिंह का करीबी नेता माना जाता है। वहीं ज्योदिरादित्य सिंधिया से इनकी लंबी राजनीतिक दुश्मनी है। ऐसे में ग्वालियार-चंबल संभाग में कांग्रेस की फिर से वापसी की योजनाओं में गोविंद सिंह की काफी अहम भूमिका है।
इस विधानसभा को मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह के परिवार का गढ़ माना जाता है। दिग्विजय सिंह इसी सीट से पहली बार 1977 में विधायक बने थे। 2018 के विधानसभा चुनाव में उनके बेट जयवर्धन सिंह ने 46,000 वोटों से जीता था। बीजेपी इस बार उनके खिलाफ मजबूत उम्मीदवार देने की कोशिशों में जुटी हुई है।
9. राऊ विधानसभा
इंदौर जिले को आमतौर पर बीजेपी का मजबूत किला माना जाता है, लेकिन यहां राऊ सीट पर पिछले कई सालों से कांग्रेस का बोलबाला है। इसकी वजह हैं कांग्रेस नेता जीतू पटवारी। पूर्व मंत्री और राज्य कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी 2013 में यहां से पहली बार विधायक बने थे। 2018 में करीब 5,700 वोटों के अंतर से उन्होंने इस सीट को अपने पास बरकरार रखा था।
10. दतिया विधानसभा
अपने विवादित बयानों के लिए जाने जाने वाले मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा एक बार फिर से दतिया विधानसभा से चुनावी मैदान में है। वह 2008 से यहां से लगातार विधायक है। हालांकि 2018 के चुनाव में कांग्रेस के भारती राजेंद्र ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी और वह करीब 2,656 वोटों के अंतर से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।