Rjasthan Election: महारानी के बाद अब राजकुमारी की बारी? बीजेपी में यूं बढ़ रहा है अगली 'वसुंधरा राजे' का कद
Rajasthan Election 2023: राजस्थान के चुनावी रण में इस बार एक "राजकुमारी" काफी सुर्खियों में है। राजनीतिक हलकों में कुछ लोगों इन्हें राजस्थान की अगली "वसुंधरा राजे" के रूप में देख रहे हैं। इनका नाम है दीया कुमारी (Diya Kumari)। बीजेपी ने राज्य के लिए 41 उम्मीदवारों की जब पहली सूची जारी की, तो उसमें राजसमंद की मौजूदा सांसद और जयपुर के राजघराने से आने वाली 52 वर्षीय दीया कुमारी का भी नाम था
Rajasthan elections 2023: वसुंधरा राजे ने ही 2013 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दीया कुमारी की BJP में एंट्री कराई थी
Rajasthan Election 2023: राजस्थान के चुनावी रण में इस बार एक "राजकुमारी" काफी सुर्खियों में है। राजनीतिक हलकों में कुछ लोगों इन्हें राजस्थान की अगली "वसुंधरा राजे" के रूप में देख रहे हैं। इनका नाम है दीया कुमारी (Diya Kumari)। बीजेपी ने राज्य के लिए 41 उम्मीदवारों की जब पहली सूची जारी की, तो उसमें राजसमंद की मौजूदा सांसद और जयपुर के राजघराने से आने वाली 52 वर्षीय दीया कुमारी का भी नाम था। पार्टी ने उन्हें जयपुर की विद्याधर नगर (Vidhyadhar Nagar) विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। खास बात यह है कि पार्टी ने उन्हें विद्याधर नगर से अपने मौजूदा विधायक नरपत सिंह राजवी का टिकट काटकर उम्मीदवार बनाया है। इसके चलते पार्टी को नरपत सिंह राजवी के समर्थकों और कुछ बीजेपी कार्यकर्ताओं की नाराजगी का भी सामना करना पड़ा।
दरअसल, नरपत सिंह राजवी की गिनती राजस्थान बीजेपी के बड़े नेताओं में होती थी। वह राजस्थान के तीन बार के मुख्यमंत्री और देश के उपराष्ट्रपति रहे दिवंगत भैंरो सिंह शेखावत के दामाद हैं। यह भैंरो सिंह शेखावत वहीं नेता हैं, जिनकी अगुआई में बीजेपी ने पहली बार किसी राज्य में अपने दम पर सरकार बनाई थी। इसके अलावा नरपत सिंह राजवी को राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और अपने समर्थकों के बीच "महारानी" के नाम से लोकप्रिय वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) का काफी करीबी माना जाता है।
नरपत सिंह राजवी साल 2008 से ही इस विधानसभा सीट से लगातार विधायक हैं और कुल 5 बार विधायक रहे हैं। इतने मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड और वसुंधरा राजे के करीबी होने के बावजूद नरपत सिंह का टिकट कटना और उनकी जगह दीया कुमारी को मैदान उतारना, साफ बताता है कि बीजेपी में इस 'राजकुमारी' का कद और दबदबा तेजी से बढ़ रहा है।
दीया कुमारी और वसुंधरा राजे में लोग देख रहे समानता
दीया कुमारी के दादा मान सिंह द्वितीय, जयपुर रियासत के आखिरी राजा रहे थे। पिछले एक दशक में धीरे-धीरे उन्होंने बीजेपी में अपनी अलग जगह बनाई है। राजनीतिक गलियारों में अभी से उनके और वसुंधरा राजे के बीच समानताएं देखी जाने लगी हैं। वसुंधरा राजे ग्वालियर के पूर्व सिंधिया राजघराने से आती है और उनकी शादी राजस्थान के धौलपुर शाही परिवार में हुई है।
यह भी दिलचस्प है कि कभी वसुंधरा राजे ने ही दीया कुमारी की बीजेपी में एंट्री कराई थी। 2013 के विधानसभा चुनाव के समय वसुंधरा राजे बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा थीं। उस समय वह चुनाव से पहले दीया कुमारी को बीजेपी में लेकर आई थीं और उन्हें सवाई माधोपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया था।
पहले चुनाव में ही दीया कुमारी ने दी थी दिग्गजों को मात
दीया कुमारी ने इस चुनाव में कांग्रेस के दानिश अबरार के साथ-साथ राजस्थान के बड़े आदिवासी नेताओं में से एक किरोड़ी लाल मीणा को भी चुनाव हराया था। किरोड़ी लाल मीणा उस वक्त नेशनल पीपुल्स पार्टी के टिकट पर सवाई माधोपुर से चुनाव लड़े थे। दरअसल, चुनाव से पहले मीणा ने वसुंधरा राजे से मतभेदों के चलते बीजेपी छोड़ दिया था और अपनी अलग पार्टी बनाकर पूरे राज्य में उम्मीदवार उतारे थे।
वसुंधरा ने तब किरोड़ी लाल मीणा को पटखनी देने के लिए दीया कुमारी को बीजेपी में शामिल कराकर उनके खिलाफ उम्मीदवार बनाया था। हालांकि उस हार के बाद 2018 में किरोड़ी लाल मीणा वापस बीजेपी में आ गए और इस वक्त बीजेपी से राज्यसभा सांसद हैं। बीजेपी ने अब फिर किरोड़ी लाल मीणा को इस विधानसभा चुनाव में सवाई माधोपुर सीट से उम्मीदवार बनाया है।
जब दीया कुमारी और वसुंधरा राजे में हुई तनातनी
साल 2016 में दीया कुमारी और वसुंधरा राजे के रिश्तों में कुछ तनाव देखा गया। वसुंधरा राजे की अगुआई वाली राजस्थान सरकार ने उस वक्त राज्य में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया था। इस दौरान जयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने इस अभियान के तहत दीया कुमारी के परिवार के स्वामित्व वाले राजमहल पैलेस होटल के गेट को सील कर दिया। इस दौरान कुमारी और सरकारी अधिकारियों के बीच काफी कहासुनी हुई, जो काफी सुर्खियों में रहा था।
वसुंधरा राजे की सरकार इस होटल को सील करने के अपने फैसले पर कायम रही। इसके बाद दीया कुमारी मां पद्मिनी देवी ने इस फैसले के बाद सितंबर 2016 में एक रैली निकाली। जयपुर के पूर्व शाही परिवार को बहुत कम मौके पर विरोध प्रदर्शन निकाले देखा जाता है। ऐसे में यह खबर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रही थी। उस वक्त बीजेपी विधायक होने के नाते दीया कुमारी इस रैली में शामिल नहीं हुई थीं, लेकिन राजपूत सभा और करणी सेना जैसे कई राजपूत संगठनों ने इसका समर्थन किया। कुमारी के बेटे पद्मनाभ सिंह ने रैली में भाग लिया, जिन्हें शाही परिवार ने अनौपचारिक रूप से 'जयपुर के महाराजा' के रूप में घोषित किया है।
इस राजमहल पैलेस की घटना के कारण पूरे राजस्थान के राजपूतों में वसुंधरा राजे की अगुआई वाली बीजेपी सरकार को लेकर नाराजगी दिखी। इसके अलावा गैंगेस्टर आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर से भी यह नाराजगी बढ़ी। इसके चलते 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक माने जाने वाला राजपूत समुदाय उससे काफी हद तक छिटक गया था।
CM पद पर दावेदारी की अटकलें तेज
2018 के विधानसभा चुनाव में दीया कुमार ने भाग भी नहीं लिया था। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें राजसमंद सीट से उतारा, जहां से यह अभी सांसद है। सांसद बनने के बाद से बीजेपी में उनका कद लगातार बढ़ा है। उन्हें राजस्थान बीजेपी में बतौर महासचिव जगह दी गई है। कई मौकों पर कांग्रेस सरकार के विरोध प्रदर्शनों की भी उन्होंने अगुआई की है।
कुमारी की बढ़ते कद को देखते हुए उनके सीएम पद की दावेदारी को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी हाईकमान की ओर से वसुंधरा राजे को साइडलाइन करने की खबरों से भी इन अटकलों को बल मिला है। वसुंधरा राजे भी जब पहली बार 2003 में राजस्थान की मुख्यमंत्री बनी थीं, उस वक्त वह सांसद थीं और पार्टी ने उन्हें केंद्र से राज्य में भेजा था।