Adani case: सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, जरूरत पड़ी तो मामले में करेंगे कार्रवाई

शेयर मार्केट की रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह अमेरिकी शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की ओर से अडानी ग्रुप पर लगाए आरोपों की जांच कर रही है। साथ ही हिंडनबर्ग की रिपोर्ट जारी होने के तुरंत पहले और बाद की बाजार गतिविधियों की भी जांच कर रही है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट अडानी ग्रुप से जुड़े विवाद पर दाखिल दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है

अपडेटेड Feb 14, 2023 पर 3:12 PM
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SEBI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जांच अभी शुरुआती चरण में है

शेयर मार्केट की रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह अमेरिकी शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की ओर से अडानी ग्रुप पर लगाए आरोपों की जांच कर रही है। साथ ही हिंडनबर्ग की रिपोर्ट जारी होने के तुरंत पहले और बाद की बाजार गतिविधियों की भी जांच कर रही है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट अडानी ग्रुप से जुड़े विवाद पर दाखिल दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इसी सुनवाई के दौरान सेबी ने कोर्ट में ये बातें कही हैं। रेगुलेटर ने साथ में यह भी कहा कि चूंकि जांच अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए इस स्तर पर चल रही कार्यवाही के विवरण को सूचीबद्ध करना उचित नहीं होगा।

SEBI ने हिंडनबर्ग पर क्या कहा?

सेबी ने अपने नोट में कहा, "हिंडनबर्ग एक अमेरिकी शॉर्ट-सेलर फर्म हैं। अमेरिकी में ऐसी और भी कई कंपनियां है। ये उन कंपनियों के बारे में छानबीन करती हैं, जिनके बारे में उनका मानना है कि उनमें कॉरपोरेट गवर्नेंस और/या वित्तीय मुद्दों से जुड़ीं कोई खामी है। इनकी रणनीति होती है कि ये ऐसी कंपनियों के शेयरों और बॉन्ड में मौजूदा बाजार भाव पर शॉर्ट पोजिशन लेती है और फिर अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करती है। अगर मार्केट को उनकी रिपोर्ट पर भरोसा होता है, तो उस कंपनी के बॉन्ड या शेयर के भाव गिरने लगते हैं।"

सेबी ने कहा, "एक बार जब भाव गिरने लगते हैं, तो जो अन्य संस्थाएं 'स्टॉप लॉस' लगाकर बैठी रहती हैं, वे भी उन्हें बेचना शुरू कर देती है। भले ही उन्हें रिपोर्ट पर विश्वास हो या न हो। इस तरह बॉन्ड और शेयरों में गिरावट का एक लंबा सिलसिला शुरू हो जाता है।"


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सेबी नोट के मुताबिक, चूंकि शॉर्ट सेलर्स ने इन कंपनियों के शेयरों की कीमत गिरने पर दांव लगाया होता है, इसलिए कीमत घटने से वे लाभ कमाते हैं। बाजार जितना अधिक उनकी रिपोर्ट पर विश्वास करके उन कंपनियों के शेयरों को गिराता है, उतना अधिक उन्हें फायदा मिलता है।

SEBI ने अडानी ग्रुप पर क्या कहा?

सेबी ने कहा कि अडानी ग्रुप की कई कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध है, जिनमें से दो का उन्होंने हाल ही में अधिग्रहण किया है। मार्केट रेगुलेटर ने कहा, "अधिग्रहण के समय ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में बड़ी तेजी देखी गई थी। उस समय से सेबी का एडिशन सर्विलांस मेथड (ASM) कई मौकों पर ट्रिगर हुआ था। ASM को शेयरों की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए बनाया गया है। यह निवेशकों के जोखिम को भी कम करता है।"

सेबी ने अपने नोट में कहा कि ग्रुप ने अमेरिकी डॉलर में कई बॉन्ड जारी किए हैं, विदेशी बाजारों में सूचीबद्ध हैं। हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उसने ग्रुप के विदेशी बाजारों में सूचीबद्ध अमेरिकी डॉलर वाले बॉन्ड्स और गैर-भारतीय ट्रेडेड डेरिवेटिव्स में शॉर्ट-पोजिशन लिया है।

बाजार को लेकर सेबी ने क्या कहा?

SEBI ने कोर्ट से यह भी कहा कि उसके पास बिना किसी रुकावट के कारोबार सुनिश्चित करने और शेयर बाजार में अस्थिरता से निपटने के लिए मजबूत ढांचा है। सेबी ने कहा कि हाल ही में एक कारोबारी समूह के शेयरों में भारी गिरावट से शेयर बाजार पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है। सेबी ने कहा, “भारतीय बाजार इससे पहले और भी बुरी अस्थिरता देख चुका है, खासतौर से कोरोना महामारी के समय। जब दो मार्च 2020 से 19 मार्च, 2020 (13 कारोबारी दिवस) के बीच निफ्टी लगभग 26 प्रतिशत गिर गया था। बाजार अस्थिरता को देखते हुए सेबी ने 20 मार्च, 2020 को अपने मौजूदा बाजार तंत्र की समीक्षा की थी और कुछ बदलाव किए थे।”

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