सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से अदाणी मामले (Adani Issue) की जांच के लिए समयसीमा को 6 महीने और बढ़ाने की मांग की है। अदाणी ग्रुप (Adani Group) पर अमेरिकी शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) ने इस साल की शुरुआत में एक रिपोर्ट जारी शेयरों की कीमतों में हेरफेर और अकाउंटिंग फ्रॉड का आरोप लगाया था। इसके बाद काफी विवाद उठा था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, जिसके बाद कोर्ट ने SEBI को दो महीने के भीतर मामले की जांच पूरी करने का आदेश दिया था।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय निवेशकों की सुरक्षा के लिए एक कमेटी का गठन भी किया था। हालांकि अब SEBI ने जांच की समयसीमा 6 महीने बढ़ाने का अनुरोध किया है। हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में अदाणी ग्रुप पर हेराफेरी से शेयरों की कीमत बढ़ाने का आरोप लगाया था। हालांकि अदाणी ग्रुप ने इन सभी आरोपों को झूठा बताते हुए खारिज किया है।
सुप्रीम कोर्ट के सामने दाखिल एक आवेदन में SEBI ने कहा, "वित्तीय आंकड़ों, नियमों के उल्लंघन और/या लेनदेन में धोखाधड़ी से जुड़े संभावित उल्लंघनों का पता लगाने की कार्रवाई को पूरा करने में छह और महीने लगेंगे।”
SEBI ने यह भी कहा कि उसने अभी तक के जांच की स्थिति, उठाए गए कदम और आंतरिक निष्कर्षों के बारे में एक्सपर्ट कमिटी के साथ जानकारी साझा किया है।
SEBI ने अपने आवेदन में कहा कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट में जिन संदिग्ध ट्रांजैक्शन का जिक्र किया गया है, उसकी जांच के लिए कम से कम महीनों की जरूरत होगी क्योंकि ये ट्रांजैक्शन बेहद जटिल हैं और इसमें कई सब-ट्रांजैक्शन भी शामिल हैं।
मार्केट रेगुलेटर ने कहा कि इसके अलावा जांच के लिए कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बैंकों से बैंक स्टेटमेंट हासिल करने की भी जरूरत होगी। इसमें 10 साल से भी अधिक पुराने ट्रांजैक्शन वाले बैंक स्टेटमेंट भी शामिल होंगे और इसमें समय लगेगा और यह चुनौतीपूर्ण होगा।