क्रेडिट कार्ड (Credit Card) का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और गांवों तक भी इसकी पहुंच हो रही हैं। क्रेडिट कार्ड के इस बढ़ते चलन ने अब खतरे की घंटे बजा दी है और ब्रोकरेज फर्मों ने इसे लेकर आगाह किया है। RBI के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में भारत में क्रेडिट कार्ड से खर्च सालाना आधार पर 26 फीसदी उछलकर 1.5 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह खर्च कुछ कारोबारी पेमेंट्स पर नियामकीय रोक और असुरक्षित रिटेल लेंडिंग पर हाई रिस्क-वेट के बावजूद बढ़ा है। क्रेडिट खर्च में इस तेज उछाल के चलते ब्रोकरेजेज बैंकों की एसेट क्वालिटी पर निगाह बनाए हुए हैं।
HDFC Bank ने सबसे अधिक जारी किए क्रेडिट कार्ड
जेपी मॉर्गन के एनालिस्ट्स का कहना है कि फरवरी में नेट करीब 11 लाख क्रेडिट कार्ड जारी किए गए। इसमें सबसे अधिक कार्ड एचडीएफसी बैंक ने जारी किया। इंडस्ट्री कार्ड का बकाया सालाना आधार पर 21 फीसदी बढ़ा है। ऐसे में जेपी मॉर्गन का मानना है कि कार्ड जारी करने की इस तेज रफ्तार के बीच एसेट क्वालिटी पर भी निगरानी रखना जरूरी होगा। HSBC के एनालिस्ट्स के मुताबिक वहीं दूसरी तरफ कुछ क्रेडिट कार्ड इश्यूअर्स पर प्रतिबंधों का असर पड़ा। जैसे कि एसबीआई कार्ड्स के स्पेंड मार्केट शेयर में भारी गिरावट आई और मासिक आधार पर यह 2.85 फीसदी कम हो गया।
RBI के सख्त रुख के बावजूद बढ़ा क्रेडिट कार्ड से खर्च
क्रेडिट कार्ड से खर्च तेजी से बढ़ रहा है। फरवरी महीने में इसमें तेज उछाल दिखी और यह अनसिक्योर्ड कंज्यूमर क्रेडिट एक्सपोजर को हाई रिस्क-वेटेज देने के बावजूद हुआ। इसके अलावा आरबीआई ने को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड पर भी अपनी जांच बढ़ा दी है। यह ऐसा फील्ड है जिसमें हाल ही में बहुत तेजी दिखी थी। आरबीआई ने सभी को-ब्रांडेड इश्यूअर्स को कार्ड इश्यू करने वाले बैंक का नाम प्रमुखता से रखने और को-ब्रांडेड पार्टनर को कार्ड का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की किसी भी लेन-देन से जुड़ी डिटेल्स का एक्सेस नहीं देने को कहा है।
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