कमर्शियल व्हीकल बनाने वाली दिग्गज कंपनी अशोक लेलैंड (Ashok Leyland) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच शुरू की है। अशोक लेलैंड पर दो कंपनियों को कथित तौर पर डिस्काउंट में बीएस-III व्हीकल्स बेचने का आरोप है, जो सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का उल्लंघन है। NDTV ने बुधवार 30 नवंबर को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में आदेश दिया था कि कोई भी ऑटोमोबाइल कंपनी या डीलर देश में केवल BS-IV मानकों वाले वाहनों की ही बिक्री कर सकता है। कोर्ट ने देश में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए यह फैसला दिया था। मनीकंट्रोल इस रिपोर्ट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका।
रिपोर्ट के मुताबिक, BS-IV मानदंडों को पूरा नहीं करने वाले वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन पर 1 अप्रैल 2017 से बैन लगा दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद दो कंपनियों- दिवाकर रोड लाइन्स और जटाधारा इंडस्ट्रीज ने Ashok Leyland से कुछ BS-III ट्रक, स्क्रैप के रूप में खरीदे।
सेंट्रल एजेंसी ने कहा कि उन्होंने नागालैंड आरटीओ अधिकारियों से नकली इनवॉयस और अशोक लेलैंड की ओर से स्क्रैप के रूप में बेचे गए कुछ वाहनों का ओरिजनल इनवॉयस इकठ्ठा किए हैं। एजेंसी ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने के इस मामले में पूर्व विधायक जेसी प्रभाकर रेड्डी, गोपाल रेड्डी और उनकी कंपनियों की जांच कर रही हैं।
करीब 60 करोड़ रुपये की संपत्ति
एजेंसी ने यह भी बताया कि प्रभाकर और गोपाल रेड्डी की कंपनियों की 38.6 करोड़ रुपये की आपराधिक राशि और 22 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की गई है।
इस साल 16.25% बढ़े Ashok Leyland के शेयर
इस बीच दोपहर ढाई बजे के करीब, अशोक लेलेंड के शेयर एनएसई पर 0.067% गिरकर 148.45 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। पिछले एक महीने में कंपनी के शेयर करीब 0.87 फीसदी लुढ़के हैं। हालांकि इस साल की शुरुआत से अब तक इसमें करीब 16.25% की तेजी आ चुकी है।