बांग्लादेश (Bangladesh) ने साल 2017 में अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी पावर (Adani Power) के साथ बिजली खरीद को लेकर एक समझौता किया था। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बांग्लादेश ने अब इस समझौते में कुछ बदलाव की मांग की है। बांग्लादेश के उर्जा मंत्री नसरूल हामिद ने न्यूज एजेंसी रायटर्स को बताया कि उन्होंने अडानी पावर को कोयले की इंपोर्ट प्राइस घटाने की मांग की है। नसरुल हामिद ने कहा, "हम आयात होने वाले कोयला की कीमत तय करने के लिए न्यूकैसल इंडेक्स का पालन करते हैं।" उन्होंने कहा, "हमें जब पायरा पावर प्लांट जैसे अन्य कोल आधारित प्लांटों के लिए कीमत पर छूट मिल रही है, तो हम अडानी के साथ भी बातचीत के लिए दरवाजा खोलना चाहते हैं। हमने उन्हें इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए एक लेटर भेजा है।"
वहीं न्यूज एजेंसी पीटीआई ने बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDC) के अधिकारी के हवाले से बताया, "कोयले से पैदा होने वाली बिजली काफी महंगी है। हमने बिदली खरीद समझौते में संशोधन के लिए भारतीय कंपनी से संपर्क किया है।"
बांग्लादेश की निजी समाचार एजेंसी UNB ने बीपीडीसी के एक अनाम अधिकारी के हवाले से बताया, "उनके द्वारा बताई गई कोयले की कीमत (400 अमेरिकी डॉलर प्रति टन) बहुत अधिक है। हमारे अनुसार यह 250 डॉलर प्रति टन से कम होनी चाहिए। हम अपने दूसरे पावर प्लांटों को भी आयातित कोयले के लिए इसी कीमत पर भुगतान कर रहे हैं।"
भारतीय विदेश मंत्रालय का क्या है इस पर कहना
गुरुवा को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि एक संप्रभु सरकार और एक प्राइवेट भारतीय कंपनी के बीच का समझौता है।
उन्होंने कहा, "मैं समझता हूं कि आप एक संप्रभु सरकार और एक भारतीय कंपनी के बीच एक सौदे का जिक्र कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि हम इसमें शामिल हैं।" यह पूछने पर कि क्या यह समझौता भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों के दायरे में नहीं आता है, उन्होंने कहा कि सरकार व्यापक तौर पर आर्थिक एकीकरण और पड़ोसी देशों के साथ संपर्क जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करती है।