Bank Deposit: FD की बजाय शेयरों में हो रहा निवेश, डिपॉजिट में आई कमी तो बैंकों ने सरकार से किया यह आग्रह

बैंकों में इस समय डिपॉजिट कम आ रहा है और लोन की मांग बढ़ रही है तो गैप काफी बढ़ रहा है यानी डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में एक मीडिया रिपोर्ट के दावे के मुताबिक देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI समेत कुछ बैंक सरकार के पास पहुंचे हैं। अधिक से अधिक डिपॉजिट्स के लिए ये बैंक इंसेंटिंव को सरकारी मंजूरी की बाट जोह रहे हैं

अपडेटेड Jun 11, 2024 पर 1:34 PM
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क्रेडिट फ्लो के मुकाबले डिपॉजिट ग्रोथ में सुस्ती ने बैंकों की दिक्कतें बढ़ा दी हैं। इससे निपटने के लिए सरकार को सुझाव दिए हैं।

बैंकों में इस समय डिपॉजिट कम आ रहा है और लोन की मांग बढ़ रही है तो गैप काफी बढ़ रहा है यानी डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में एक मीडिया रिपोर्ट के दावे के मुताबिक देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI समेत कुछ बैंक सरकार के पास पहुंचे हैं। अधिक से अधिक डिपॉजिट्स के लिए ये बैंक इंसेंटिंव को सरकारी मंजूरी की बाट जोह रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2024 में जिस स्पीड से क्रेडिट फ्लो बढ़ा, डिपॉजिट की ग्रोथ उससे काफी कम रही तो बैंकों को इस गैप को पाटने के लिए सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) का अधिक खर्चीला रास्ता अपनाना पड़ा था।

बैंकों ने क्या दिया है सुझाव?

क्रेडिट फ्लो के मुकाबले डिपॉजिट ग्रोथ में सुस्ती ने बैंकों की दिक्कतें बढ़ा दी हैं। इससे निपटने के लिए सरकार को सुझाव दिए हैं। इसमें से एक सुझाव ये है कि टैक्स-सेविंग एफडी का लॉक इन पीरियड घटा दिया जाए। अभी यह पांच साल है और इसे घटाकर तीन साल किए जाने का सुझाव दिया गया है। बैकों के मुकाबिक शेयरों, म्यूचुअल फंडों और टैक्स बचाने वाली इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम्स (ELSS) को निवेशक टैक्स बचाने वाली एफडी की तुलना में अधिक पसंद कर रहे हैं। टैक्स बचाने वाली सभी योजनाओं का लॉक-इन पीरियड पांच साल है तो बैंकर्स का सुझाव है कि अगर इसे तीन साल कर दिया जाए तो निवेशकों का रुझान इस तरफ बढ़ेगा।


शेयरों की तेजी के आगे फीके पड़े FD

रिपोर्ट के मुताबिक परिवारों के ग्रॉस फाइनेंशियल सेविंग्स की ग्रॉस नेशनल डिस्पोजेबल इनकम (GNDI) में हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2021 में 6.2 फीसदी थी जो वित्त वर्ष 2023 में घटकर 4 फीसदी पर आ गई। वहीं इस दौरान शेयरों और डिबेंचर्स में निवेश 0.5 फीसदी से बढ़कर 0.8 फीसदी पर पहुंच गया। बैंक एग्जेक्यूटिव्स के मुताबिक शेयर मार्केट की शानदार तेजी के चलते निवेशक अब उसी की तरफ भाग रहे हैं। इसका असर डिपॉजिट ग्रोथ पर दिख रहा है।

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