कतर इनवेस्टमेंट अथॉरिटी (QIA) रिलायंस रिटेल वेंचर्स (Reliance Retail Ventures) में 8278 करोड़ रुपये निवेश कर रही है। इस सौदे के तहत इसे 0.99 फीसदी हिस्सेदारी मिलेगी। ब्रोकरेज के मुताबिक यह सौदा पहले के अनुमान यानी 100 करोड़ डॉलर (8.28 लाख करोड़ रुपये) के वैल्यूएशन पर हुआ है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म सिटी इस सौदे को लेकर काफी पॉजिटिव है और उसका मानना है कि जियो फाइनेंशियल सर्विसेज (Jio Financial Services) की लिस्टिंग के बाद अब रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL) की बारी हो सकती है। सिटी ने रिलायंस को 2750 रुपये के टारगेट प्राइस पर खरीदारी की रेटिंग दी है। रिलायंस की रिलायंस रिटेल में 88.9 फीसदी हिस्सेदारी है।
तीन साल में Reliance Retail Ventures का वैल्यूएशन हुआ दोगुना
रिलायंस रिटेल वेंचर्स में कतर इनवेस्टमेंट अथॉरिटी ने 8.28 लाख करोड़ रुपये के वैल्यूएशन पर निवेश किया है। इससे पहले इसे वैश्विक निवेशकों से जो निवेश हासिल हुआ था, उसकी बात करें तो वर्ष 2020 में इसे 4.21 लाख करोड़ रुपये के प्री-मनी इक्विटी वैल्यू पर 47,625 करोड़ रुपये का निवेश मिला था। इस प्रकार तीन साल में कंपनी का वैल्यूएशन दोगुना हो गया है। रिलायंस रिटेल वेंचर्स का EBITDA भी तीन साल में दोगुना होकर वित्त वर्ष 2023 में 17900 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने वित्त वर्ष 2025 के अनुमानित EBITDA के मुकाबले एंटरप्राइज वैल्यू 37 गुना का अनुमान लगाया है जिसके आधार पर इसकी एंटरप्राइज वैल्यू 11.7 लाख करोड़ रुपये बैठ रही है जो 1670 रुपये के शेयर भाव पर है। ब्रोकरेज के मुताबिक इसके हिसाब से रिलायंस के शेयर में इसकी हिस्सेदारी 1485 रुपये बैठ रही है।
कम हिस्सेदारी वाले निवेशकों के शेयर हो रहे वापस
कतर इनवेस्टमेंट अथॉरिटी के साथ रिलायंस रिटेल वेंचर्स का यह सौदा ऐसे समय में हुआ है, जब एक महीने पहले कंपनी ने कम हिस्सेदारी रखने वाले निवेशकों के शेयरों को रद्द कर रही है। रिलायंस रिटेल वेंचर्स की रिलायंस रिटेल में 99.91 फीसदी हिस्सेदारी है और बाकी 0.9 फीसदी हिस्सेदारी नॉन-प्रमोटर शेयरहोल्डर्स के पास है। रिलायंस रिटेल के साथ-साथ रिलायंस रिटेल वेंचर्स की रिलायंस ब्रांड्स और मार्के एंड स्पेंसर जैसी और भी सब्सिडियरीज और ज्वाइंट वेंचर्स हैं। मोतीलाल ओसवाल को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2023 से वित्त वर्ष 2025 के बीच इसका रेवेन्यू 25 फीसदी की CAGR से बढ़कर 4.1 लाख करोड़ रुपये और EBITDA भी 34 फीसदी की CAGR से बढ़कर 32 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच सकता है।
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