Budget 2022: MSME सेक्टर को राहत के लिए कच्चे माल की कीमतें घटाने और फंसी रकम दिलाने की चुनौती

MSME सेक्टर के लिए कच्चे माल की कीमतों को कम करने, छोटे उद्यमियों को सस्ता और आसान कर्ज मुहैया कराने और खरीदारों के पास फंसी बकाया रकम लौटाने के लिए जरूरी उपाय करने की है

अपडेटेड Jan 22, 2022 पर 9:08 AM
Story continues below Advertisement
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कोविड-19 की दूसरी लहर को थामने के मकसद से हुई कोरोनाबंदी की मार के बीच अपने शटर गिरा रहे MSMEs सेक्टर को राहत-पैकेज की प्राथमिकताओं में रखा था

चंदन श्रीवास्तव

जरा इस सीन पर विचार कीजिएः आप छोटे या मंझोले दर्जे के कारोबारी हैं, स्कूली बच्चों के जूते या बैग बनाने का आपका कारोबार है। आपका लागत-खर्च बढ़ता जा रहा है क्योंकि कच्चे माल की कीमत बढ़ रही है और जो सेवा या सामान आपने बेचे उसे हासिल होने वाली रकम खरीदार के हाथ में ही फंसी रह गई है।

संस्थागत कर्ज हासिल कर पाना आपके लिए मुश्किल है क्योंकि आपकी कारोबारी हैसियत बहुत छोटी है और बैंक सवाल कर रहे हैं कि आप पर तो हमारा पहले से ही कर्ज चढ़ा है, ऐसे में आपके पास जमानत के तौर पर दिखाने को ऐसा क्या है जो हम विश्वास करें कि आप कर्ज की नई रकम को निर्धारित समय-सीमा के भीतर लौटा देंगे ? कारोबार की ऐसी दशा में फंसकर सबसे पहले आप क्या करेंगे ?


खरीदार के हाथ में फंसी हुई रकम को हासिल करने के लिए आप सरकार के बनाये फोरम की मदद लेने जाते हैं, लेकिन आपको पता चलता है कि यहां तो आपके जैसे लाखों कारोबारियों की कतार लगी है, पता नहीं इस कतार में आपका नंबर कब आये ? आपको यह भी पता चलता है कि अपना फंसा हुआ पैसा पाने की आस में कतार में लगे इन कारोबारियों में बहुत से ऐसे हैं जिनका पैसा खुद सरकारी विभागों और मंत्रालयों पर बकाया पड़ा है।

ऐसे में कोई कहे कि सरकार आप पर पूरा ध्यान दे रही है, आप दरअसल सरकार की आर्थिक नीति की प्राथमिकताओं में एक हैं, तो क्या आप इस बात पर सहज विश्वास कर पायेंगे ? सरकार की आर्थिक नीतियों की प्राथमिकताओं में शामिल होने की बात आपको अपने साथ एक भद्दा मजाक लगेगी और शायद,आपको ऐसे मजाक पर गुस्सा भी आये।

एमएसएमई (MSME) सेक्टर की हालत

देश का विशाल MSME सेक्टर कोरोना की नई लहर की मार झेल रहे इस वक्त में ऐसी ही दशा में है। जी हां, आपने बिल्कुल ठीक समझा—यहां उसी MSMEs सेक्टर की बात हो रही है जिसका भारत की जीडीपी में 30 प्रतिशत का योगदान है, जिसमें देश के 11 करोड़ लोगों को रोजगार हासिल है, जिसकी ज्यादातर(50 प्रतिशत से अधिक) इकाइयां भारत के ग्रामीण या फिर रुर्बन कहलाने वाले इलाकों में केंद्रित हैं और देश से होने वाले कुल निर्यात में जिस सेक्टर की 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी है.

जाहिर है, फिर मौजूदा सरकार के `आत्मनिर्भर-भारत` के सपने को साकार करने के लिहाज से यह सेक्टर बड़ा अहम है। सरकार कहती है कि इस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए उसने ढेरो उपाय किये हैं और MSME सेक्टर को बढ़ावा देना उसकी प्राथमिकताओं में एक है। लेकिन, सरकार के इस कहे और किये से जमीनी सच्चाई का कोई मेल नहीं है।

BUDGET 2022: रिन्यूएबल एनर्जी के लिए बजट में हो सकते हैं बड़े ऐलान

मिसाल के लिए, याद करें अब से कोई सात-आठ माह पहले का समय – तब वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कोविड-19 की दूसरी लहर को थामने के मकसद से हुई कोरोनाबंदी की मार के बीच अपने शटर गिरा रहे MSMEs सेक्टर को राहत-पैकेज की प्राथमिकताओं में रखा।

जून(2021) के आखिरी हफ्ते में घोषणा हुई कि इमर्जेन्सी क्रेटिड लाइन गांरंटी स्कीम(ECLGS) के तहत इस सेक्टर की इकाइयों को मिलने वाले कर्ज की सीमा में 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करते हुए 4.5 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। (याद रहे, साल 2020 के मई में 20 लाख करोड़ रुपये के जिस आत्मनिर्भर-भारत अभियान पैकेज की घोषणा हुई थी उसमें ECLGS के तहत MSMEs सेक्टर की इकाइयों को दिये जाने वाले कर्ज की सीमा 3 लाख करोड़ की रखी गई थी)। एक नई स्कीम की भी घोषणा हुई जिसमें इस सेक्टर की 25 लाख छोटी इकाइयों को सूद की सुविधाजनक दर पर 1.25 लाख रुपये का कर्ज देने की बात कही गई।

MSME सेक्टर की छोटी-बड़ी इकाइयों को उनकी हैसियत और जरुरत के मुताबिक कर्ज मिले, इस बात का ध्यान रखते हुए परिभाषा में भी बदलाव किया गया। नई परिभाषा के मुताबिक, 50 करोड़ रुपये तक के निवेश और 250 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली इकाइयों को मंझोले दर्जे के उद्यम( मीडियम कैटेगरी इन्टरप्राइज) के अंतर्गत रखा गया। कुल 10 करोड़ रुपये के निवेश और 50 करोड़ रुपये तक के कारोबार(टर्नओवर) वाली इकाइयों को छोटे उद्यम एवं 1 करोड़ रुपये के निवेश तथा 5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली इकाइयों को अत्यंत छोटे यानी माइक्रो इंटरप्राइजेज की श्रेणी में आने वाले उद्यम का दर्जा दिया गया।

कर्ज की रकम बढ़ाने और कर्ज फराहम करने की शर्तों को आसान बनाते हुए MSMEs सेक्टर की इकाइयों की परिभाषा बदलने की इस पहल के बाद छोटे और मंझोले दर्जे के कारोबारियों के बीच क्या असर हुआ, जरा इसका अंदाजा लगाइए। घोषणा के छह माह के भीतर MSMEs सेक्टर के कारोबारी सड़कों पर थे।

बीते दिसंबर माह में माइक्रो, मीडियम एंड स्मॉल इंटरप्राइजेज के संगठन AICA (ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ एसोसिएशन ऑफ एमएसएमईज्) ने MSMEs सेक्टर के कारोबारियों की एक दिन की हड़ताल बुलायी। कारोबारी मांग कर रहे किः खरीदारों के हाथ में हमारा जो बकाया पैसा है, सरकार उसे वापस दिलाये। कच्चे माल की बढ़ी हुई कीमत पर लगाम लगे और संस्थागत कर्ज का मिलना आसान बनाया जाये।

बकाया रकम और बढ़े हुए लागत खर्च का सवाल

दिसंबर माह की एक दिनी हड़ताल से पहले AICA ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सार्वजनिक रुप से मांग की थी कि कच्चे माल की कीमतों में इजाफे के कारण MSMEs सेक्टर की इकाइयों के लिए बाजार की प्रतिस्पर्धा में टिका रहना मुश्किल हो रहा है, सो ऐसे उपाय किये जायें कि कच्चे माल की कीमते घटकर उसी स्तर पर चली जायें जहां वे 2020 के अप्रैल महीने में थीं।

समाचारों में AICA के हवाले से यह तथ्य सामने आया था कि 2020 के अप्रैल माह से 2021 के अक्तूबर माह तक MSMEs सेक्टर के इस्तेमाल के बहुत से कच्चे माल की कीमतों में लगातार इजाफा हुआ। मिसाल के लिए, अल्युमिनियम अयस्क की कीमतें 154 फीसदी की बढ़त के साथ 106 रुपये प्रतिकिलो से चढ़कर 270 रुपये पर आ गईं।

इसी तरह कॉपर(तांबे) की कीमत 119 प्रतिशत के इजाफे के साथ प्रतिकिलो 355 रुपये से बढ़कर 779 रुपये पर आ गयी। क्राफ्ट पेपर की कीमत में 110 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई और इसकी कीमतें 20 रुपये प्रतिकिलो से बढ़कर 42 रुपये प्रतिकिलो पर चली आईं। यही हाल प्लास्टिक (इंजीनियरिंग) का रहा जिसकी कीमतें 100 प्रतिशत की बढ़त के साथ 70 रुपये प्रतिकिलो से बढ़कर 140 रुपये प्रतिकिलो पर पहुंच गईं।

जहां तक खरीदारों के हाथ में MSMEs सेक्टर की इकाइयों के बकाये रकम के फंसे होने की बात है—हालत बद से बदतर होती जा रही है। MSMEs सेक्टर की इकाइयों को भुगतान में हो रही देरी के मसले निबटाने के लिए बने सरकारी समाधान पोर्टल के तथ्यों के मुताबिक इस साल के जनवरी माह के पहले पखवाड़े तक पोर्टल के पास भुगतान में देरी के समाधान के लिए आयी अर्जियों की संख्या 1 लाख से भी ज्यादा (कुल 1,00,203 ) हो चली थी और इन अर्जियों में बतायी गई रकम को एक साथ जोड़ दें तो नजर आएगा कि छोटे कारोबारियों का अपने बेचे उत्पाद का कुल 26,210.86 करोड़ रुपया खरीदारों के हाथ में फंसा हुआ है।

ध्यान रहे कि समाधान पोर्टल की शुरुआत 2017 के अक्तूबर माह में हुई। यह कदम माइक्रो,स्मॉल एंड मीडियम इन्टरप्राइजेज एक्ट (2006) के तहत उठाया गया था। इस एक्ट की जरुरतों के मुताबिक राज्यों में माइक्रो एंड स्माल इन्टरप्राइज फेसिलिटेशन काउंसिल (MSEFC) बनाये गये, जहां भुगतान में 45 दिन की देरी होने पर शिकायत के समधान के लिए कारोबारी अर्जी दे सकते हैं। इस काउंसिल को अर्जी मिलने के 90 दिनों के भीतर समाधान करना होता है। सो, भुगतान में देरी की 1 लाख से ज्यादा अर्जियां पिछले बीते साढ़े चार सालों में आयी हैं यानी हर साल 20 हजार से ज्यादा अर्जियां।

UNION BUDGET 2022: जानिए इकोनॉमी की मजबूती पर बजट में कितना रहेगा फोकस

समाधान पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक इन अर्जियों में से मात्र 12,099 मामलों (12 प्रतिशत) का एमएसई फेसिलिटेशन काउंसिल्स (MSEFCs) ने समाधान किया यानी फंसी रकम वाले कारोबारी कुल 2,084.18 करोड़ रुपये की रकम पा सके। जनवरी माह के पहले पखवाड़े तक लगभग पौने दस हजार ( कुल 9,737) अर्जियों की 1,400.99 करोड़ रुपये की रकम का भुगतान आपसी सुलह से हुआ था। कुल 20,974 अर्जियां काउंसिल ने खारिज कर दीं। बाकी बची 57,392 (57.2 प्रतिशत) यानी आधे से ज्यादा अर्जियों का समाधान होना बाकी है।

आप चाहें तो इस बात पर हैरत कर सकते हैं कि छोटे कारोबारियों का जहां पैसा फंसा है उनमें कई मंत्रालयो और विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र यानी पीएसयू युनिट, रेलवे जोन, रेलवे डिवीजन, ऑडिनेन्स(आयुध) फैक्ट्री आदि के नाम शामिल हैं। समाधान पोर्टल के आंकड़े के हवाले से छपी खबरों में कहा गया है कि छोटे उद्यमों के भुगतान में देरी के कुल 18,072 मामले ऐसे हैं जिनमें 11 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा (11,202 करोड़) की रकम सरकार के मंत्रालयों और विभागों पर बकाया है।

सो, अगर MSME सेक्टर की जरुरतों के एतबार से सोचें तो बजट में वित्तमंत्री के सामने बड़ी चुनौती कच्चे माल की कीमतों को कम करने, छोटे उद्यमियों को सस्ता और सुवधाजनक कर्ज मुहैया कराने और खरीदारों के पास फंसी उनकी बकाया रकम लौटाने के लिए जरुरी उपाय करने की है।

(लेखक सामाजिक सांस्कृतिक स्कॉलर हैं)

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।