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UNION BUDGET 2022: निर्मला सीतारमण को LTA कैश वाउचर स्कीम की डेडलाइन बढ़ानी चाहिए, जानिए क्यों

पिछले साल कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद फिर से ट्रैवल पर रोक लग गई। अलग-अलग राज्यों ने ट्रैवल पर अलग-अलग तरीके से बंदिशें लगा दीं। फिर, ओमिक्रॉन आ गया है। इसके चलते फिर से इंप्लॉयीज को एलटीए कैश वाउचर स्कीम का फायदा देना जरूरी है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 21, 2022 पर 6:32 PM
UNION BUDGET 2022: निर्मला सीतारमण को LTA कैश वाउचर स्कीम की डेडलाइन बढ़ानी चाहिए, जानिए क्यों
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को एलटीए कैश वाउचर स्कीम की डेडलाइन अगले साल मार्च तक बढ़ाने का एलान कर सकती हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) को एलटीए कैश वाउचर स्कीम (LTA Cash Voucher Scheme) की समयसीमा बढ़ानी चाहिए। वह 1 फरवरी को बजट पेश करने जा रही है। इस मौके पर वह इस स्कीम की डेडलाइन बढ़ा सकती हैं। आइए जानते हैं यह स्कीम क्या है और यह भी कि इसकी डेडलाइन बढ़ाने की जरूरत क्यों है। हम यह भी जानेंगे कि इस स्कीम का फायदा किसे मिलता है।

क्या है एलटीए वाउचर स्कीम?

इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA/LTC) पर टैक्स एग्जेम्प्शन की सुविधा मिलती है। एलटीए की सुविधा कंपनी अपने इंप्लॉयीज को देती हैं। 2020 में कोरोना की महामारी शुरू होने के बाद लोगों ने ट्रैवल करना बंद कर दिया। इस वजह से एलटीए पर टैक्स एग्जेम्प्शन क्लेम करने का रास्ता बंद हो गया। फिर, सरकार ने इंप्लॉयीज को राहत देने और इकोनॉमी में डिमांड बढ़ाने के लिए एलटीसी कैश वाउचर स्कीम का ऐलान किया। एलटीए कैश वाउचर स्कीम का ऐलान अक्टूबर 2020 में किया गया। फिर इसे फाइनेंस एक्ट, 2001 के जरिए अधिसूचित किया गया। इस स्कीम का फायदा 31 मार्च 2021 तक उठाया जा सकता था।

कैसे मिलता था स्कीम का फायदा?

एलटीए कैश वाउचर स्कीम के तहत इंप्लॉयी को डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) के जरिए गुड्स या सर्विस खरीदने की इजाजत थी। शर्त यह थी कि उस गुड्स या सर्विस पर जीएसटी की दर 12 फीसदी से कम नहीं होनी चाहिए। फिर, एलटीसी फेयर पर टैक्स एग्जेम्प्शन का दावा किया जा सकता था। 4 सदस्यीय परिवार में प्रति व्यक्ति 36,000 रुपये की दर से या खर्च रकम के एक-तिहाई हिस्से (दोनों में से जो कम हो)पर टैक्स एग्जेम्प्शन का दावा किया जा सकता था। इस स्कीम के तहत इंप्लायर (कंपनी) कर्मचारी को पर्चेज बिल की जांच के बाद खरीद की रकम रीइम्बर्स करता था। रीइंबर्समेंट की रकम टैक्स-फ्री थी।

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