अगले वित्त वर्ष सुस्त रह सकती है GDP की नॉमिनल ग्रोथ, बजट की तैयारियों पर ऐसे डाल सकता है यह असर

Budget 2023: अगले वित्त वर्ष 2023-24 में देश की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ कमजोर रह सकती है। इसका असर टैक्स कलेक्शन पर दिखेगा और 2024 के आम चुनाव से पहले केंद्र सरकार पर खर्च घटाने का दबाव रहेगा। नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ में इंफ्लेशन भी शामिल होता है और अगले वित्त वर्ष के बजट के लिए टैक्स कलेक्शन का अनुमान लगाने में इसे बेंचमार्क के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है

अपडेटेड Jan 10, 2023 पर 2:10 PM
सरकार को अगर टैक्स रेवेन्यू कम मिलेगा तो इसके पास खर्च करने और इकोनॉमी को सपोर्ट करने के लिए अधिक पैसे नहीं होगे। इसके अलावा सरकार ने 2025-26 तक राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.5 फीसदी तक लाने का जो लक्ष्य रखा है, उसे हासिल करने में भी दिक्कत आएगी।

Budget 2023: अगले वित्त वर्ष 2023-24 में देश की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ कमजोर रह सकती है। इसका असर टैक्स कलेक्शन पर दिखेगा और 2024 के आम चुनाव से पहले केंद्र सरकार पर खर्च घटाने का दबाव रहेगा। नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ में इंफ्लेशन भी शामिल होता है और अगले वित्त वर्ष के बजट के लिए टैक्स कलेक्शन का अनुमान लगाने में इसे बेंचमार्क के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। चालू वित्त वर्ष में इसके 15.4 फीसदी पर रहने का अनुमान है। वहीं अगले वित्त वर्ष की बात करें तो कम से कम चार दिग्गज इकोनॉमिस्ट्स का अनुमान है कि महंगाई सुस्त होने और रीयल जीडीपी ग्रोथ फीकी होने के चलते यह 8-11 फीसदी के बीच रह सकता है। चालू वित्त वर्ष 2022-23 में 7 फीसदी की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगाया गया है।

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क्या है इकोनॉमिस्ट्स का अनुमान

Deutsche Bank के मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री कौशिक दास के मुताबिक वित्त वर्ष 2024 में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 8-9 फीसदी रह सकती है। कोविड आने से पहले वित्त वर्ष 2019-20 में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 7.6 फीसदी थी। वहीं एसबीआई और रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक अगले वित्त वर्ष में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ करीब 10 फीसदी रह सकती है।


इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के मुताबिक इस ग्रोथ के हिसाब से टैक्स कलेक्शन में 9.4 फीसदी की बढ़ोतरी होनी चाहिए। अदिति का मानना है कि अगले साल एक्साइज और कस्टम ड्यूटी में सुस्त ग्रोथ के चलते टैक्स कलेक्शन को लेकर पक्के तौर पर अनुमान नहीं जाहिर किया जा सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने अगले वित्त वर्ष में 11-12 फीसदी की नॉमिनल ग्रोथ का अनुमान लगाया है।

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राजकोषीय घाटे को लेकर क्या है अनुमान

केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में 11.1 फीसदी के नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगाया था। यह मौजूदा अनुमानित आंकड़े से काफी कम है। सांख्यिकीय कार्यालय ने शुक्रवार को 15.4 फीसदी की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान जाहिर किया था। अगर ऐसा होता है तो बोफा ग्लोबल रिसर्च के मुताबिक सरकार का नेट कलेक्शन 1.15 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान के लेवल को पार कर सकता है। वहीं राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 6.4 फीसदी पर रखने में मदद मिलेगी। नॉन-टैक्स रेवेन्यू कम रह सकता है और खर्च 1.35 लाख करोड़ रुपये बढ़ सकता है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के इकोनॉमिस्ट्स के मुताबिक राजकोषीय घाटा जीडीपी के घटकर 6.1 फीसदी पर आ सकता है लेकिन अधिक खर्च के चलते इसके 6.4 फीसदी पर बने रहने के आसार हैं।

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इक्रा के मुताबिक अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 5.8 फीसदी और बैंक ऑफ बड़ौदा के इकोनॉमिस्ट के मुताबिक 5.75-6 फीसदी पर रह सकता है। बोफा ग्लोबल रिसर्च के मुताबिक अगले वित्त वर्ष में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ चालू वित्त वर्ष की तुलना में कम रह सकती है लेकिन हायर टैक्स बॉइअन्सी, सब्सिडी बिल में गिरावट और टारगेटेड एक्सपेंडिचर के चलते फिस्कल डेफिसिट कम करने में मदद मिलेगी। बोफा ग्लोबल रिसर्च के मुताबिक अगले साल राजकोषीय घाटा जीडीपी के 5.8 फीसदी पर रह सकता है।

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टैक्स रेवेन्यू घटने से क्या होती है दिक्कत

सरकार को अगर टैक्स रेवेन्यू कम मिलेगा तो इसके पास खर्च करने और इकोनॉमी को सपोर्ट करने के लिए अधिक पैसे नहीं होगे। इसके अलावा सरकार ने 2025-26 तक राजकोषीय घाटे को जीडीपी के  4.5 फीसदी तक लाने का जो लक्ष्य रखा है, उसे हासिल करने में भी दिक्कत आएगी। दास के मुताबिक ऊंची नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ ने न सिर्फ सरकार के कर्ज और फिस्कल रेशियो को कम करने में मदद की है बल्कि वित्त वर्ष 2023 में क्रेडिट ग्रोथ को सालाना आधार पर ऊपर ले जाकर 16-17 फीसदी तक पहुंचाने में मदद किया है। चालू वित्त वर्ष में नवंबर 2022 तक सरकार ने 12.24 लाख करोड़ रुपये का टैक्स कलेक्ट किया जो सालाना बजट का 63 फीसदी है।

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