क्रिप्टोकरेंसी इंडस्ट्री को इस बार बजट से काफी उम्मीदें हैं। Bharat Web3 Association (BWA) ने इस बारे में फाइनेंस मिनिस्ट्री को लेटर लिखा है। BWA क्रिप्टोकरेंसी और Web3 इंडस्ट्री बॉडी है। इसने क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े टैक्स के नियमों और इसके रेगुलेशन को लेकर अनिश्चितता के बारे में वित्त मंत्रालय को बताया है। बीडब्ल्यूए के प्रतिनिधियों की मुलाकात अगले हफ्ते CBDT के अधिकारियों से होने की उम्मीद है। अभी इंडिया में क्रिप्टोकरेंसी इंडस्ट्री को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें क्रिप्टो एक्सचेंजों में ट्रेडिंग वॉल्यूम में लगातार आ रही गिरावट, क्रिप्टो टोकन की ग्लोबल वैलिडिटी प्रमुख हैं। पहले से ही क्रिप्टोकरेंसी के निवेशकों के बीच सेंटीमेंट कमजोर है। इसमें FTX मामले का बड़ा हाथ है। एफटीएक्स दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रिप्टो एक्सचेंज था। इस साल सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी से होने वाले मुनाफे पर टैक्स लगाया था। इसके बाद से क्रिप्टोकरेंसी के ट्रेडिंग वॉल्यूम में 85-90 फीसदी कमी आई है।
क्रिप्टोकरेंसी के वॉल्यूम पर टैक्स का असर
BWA के प्रवक्ता ने बताया, "बीडब्ल्यू टैक्स के मौजूदा प्रावाधानों के असर बारे में फाइनेंस मिनिस्ट्री को अवगत कराना चाहता है। इसमें टीडीएस, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स से इनकम पर टैक्स और लॉस को कैरी फॉरवर्ड करने की इजाजत नहीं देना शामिल है। कुछ संशोधन के बारे में भी हम इनपुट्स देना चाहते हैं जिससे सरकार की चिंता तो दूर होगी ही साथ ही क्रिप्टोकरेंसी सेक्टर की भी ग्रोथ होगी। "
टीडीसी से जुड़े नियमों को नरम बनाने की जरूरत
प्रवक्ता ने कहा कि एसोसिएशन वेब3 और ब्लॉकचेन से जुड़े इनोवेशंस और रिसर्च के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर अपना फोकस बनाए रखना चाहता है। वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) में क्रिप्टोकरेंसी टोकंस, नॉन-फंजिबल टोकंस (NFT) शामिल हैं। इस साल अप्रैल से इससे होने वाली इनकम पर 30 फीसदी की दर से टैक्स लगता है। सरकार ने 1 जुलाई से स्रोत पर टैक्स कटौती (TDS) लागू किया था। यह इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए चिंता का कारण बन गया है। 10,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर 1 फीसदी टीडीएस लागू होता है। इससे रोजाना कैपिटल का बड़ा हिस्सा इस साइकिल में फंस जाता है। इस टीडीएस अमाउंट को सिर्फ रिटर्न फाइलिंग के वक्त ही क्लेम किया जा सकता है।
निर्लमा सीतारमण का यह पांचवां बजट होगा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अगले साल 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी। यह उनका पांचवां बजट होगा। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का यह 10वां पूर्ण बजट होगा। यह बजट ऐसे वक्त आ रहा है, जब ग्लोबल इकोनॉमी मुश्किलों का सामना कर रही है। इंडियन इकोनॉमी दुनिया में इकलौती ऐसी बड़ी अर्थव्यवस्था है जिसकी सेहत अच्छी है।