Budget 2023: रेलवे, ट्रांसपोर्ट और मेट्रो क्या बनेगा एक ही मंत्रालय? जानिए सरकार का प्लान

Budget 2023: इस बार के बजट में रेलवे, ट्रांसपोर्ट और मेट्रो के लिए कुछ बड़ा ऐलान किया जा सकता है। कहा जा रहा है कि इन्हें जोड़कर एक मंत्रालय बनाया जा सकता है। पहले भी बजट में सरकार ने मंत्रालयों के नाम, काम और स्ट्रक्चर में बदलाव किए हैं। ऐसे में मंत्रालयों को मर्ज करने की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता है

अपडेटेड Jan 31, 2023 पर 5:25 PM
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सरकार रेलवे, ट्रांसपोर्ट और मेट्रो को एक साथ जोड़ने की तैयारी में है

Budget 2023: 1 फरवरी 2023 को आम बजट पेश किया जाएगा। देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम बजट पेश करेंगी। इस बार के बजट से हर तबके के लोगों को काफी उम्मीदें हैं। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट होगा। इस बजट में कई लोकलुभावन ऐलान भी किए जा सकते हैं। इस बीच कहा जा रहा है कि सरकार रेलवे, ट्रांसपोर्ट और मेट्रो के बारे में कोई बड़ा फैसला ले सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार इन तीनों मंत्रालयों को एक साथ मर्ज कर दें।

सरकार पहले भी कई सारे मंत्रालयों के नाम बदलती रही है। ऐसे में मर्ज करने की इस खबर को पूरी तरह से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार बजट में रेल, रोड ट्रांसपोर्ट और मेट्रो को जोड़कर एक ही मंत्रालय बना सकती है। इसके पहले भी बजट में सरकार ने मंत्रालयों के नाम, काम और स्ट्रक्चर में बदलाव किया है। ऐसे सरकार ट्रांसपोर्टेशन को और बेहतर बनाने के लिए इन सभी मंत्रालयों को एक साथ मर्ज कर दे। कहा जा रहा है कि आम बजट 2023-24 में सरकार रेलवे को लेकर कोई बड़े ऐलान कर सकती है। उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार वंदे भारत ट्रेनों, ट्रैक के निर्माण, रेलवे के इलेक्ट्रिफिकेशन और वंदे भारत ट्रेनों (Vande Bharat Train) के विस्तार पर अपना फोकस बढ़ा सकती है। इतना ही नहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) रेल बजट के आवंटन में इजाफा कर सकती हैं।

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पहले अलग था रेल बजट

साल 2017 के पहले भारतीय रेलवे के लिए अलग से रेल बजट पेश होता था। इसे आमतौर पर यूनियन बजट के एक दिन पहले सदन में पेश किया जाता था। मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में रेल बजट को भी आम बजट का ही हिस्सा बना दिया। तत्कालीन वित्त मंत्री अरूण जेटली ने 1 फरवरी, 2017 को आजाद भारत का पहला संयुक्त बजट पेश किया था। मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में बजटीय सुधारों के तहत 2016 में देश के आम बजट में ही रेलवे बजट को आम बजट में मिलाने का फैसला किया। नीति आयोग की सलाह पर केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया था।

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